US Iran Sanctions: ईरान के चक्कर में 4 भारतीय कंपनियां बैन, 3 भारतीयों पर भी अमेरिका का एक्शन

ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए अमेरिका ने चार भारत-स्थित कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी के मुताबिक इन पर ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार से जुड़े होने का आरोप है। करीब 119 मिलियन डॉलर के कारोबार का हवाला देते हुए वॉशिंगटन ने बड़ा एक्शन लिया।

US Iran Sanctions

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 26, 2026

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US Iran Sanctions:  ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिकी रणनीति का असर अब भारत से जुड़े कारोबार तक भी पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र से कथित कारोबारी संबंधों को लेकर भारत में स्थित चार कंपनियों और तीन भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन के नए अभियान ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत की गई है। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि इन कंपनियों ने ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन किए।

चार भारत आधारित कंपनियां प्रतिबंधों के घेरे में

अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी सूची में चार भारतीय कंपनियों के नाम शामिल हैं। इनमें पोर्टीज पार्टनर्स एलएलपी, सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि इन कंपनियों की गतिविधियां ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात और व्यापार से जुड़ी रही हैं। प्रतिबंधों के तहत संबंधित कंपनियों के साथ कारोबार पर अमेरिकी नियमों के अनुसार कई तरह की पाबंदियां लागू हो सकती हैं।

पोर्टीज पार्टनर्स पर ईरानी उत्पादों की खेप में मदद का आरोप

अमेरिकी आरोपों के मुताबिक, पोर्टीज पार्टनर्स एलएलपी ने कस्टम्स ब्रोकर के तौर पर ईरान से आने वाले पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेप भारत पहुंचाने में सहायता की। कंपनी से जुड़े दो भारतीय नागरिकों इंद्रिस्मिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी को भी अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इनकी गतिविधियां ईरानी पेट्रोलियम कारोबार से संबंधित लेनदेन को आगे बढ़ाने में मददगार रहीं।

सदाशिवा ओवरसीज पर 69 मिलियन डॉलर के आयात का आरोप

अमेरिकी कार्रवाई में सबसे बड़ी रकम सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड से जुड़ी बताई गई है। अमेरिकी सरकार के अनुसार, कंपनी ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच लगभग 6.9 करोड़ डॉलर, यानी करीब 580 करोड़ रुपये मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। अमेरिकी दस्तावेजों में दावा किया गया है कि इनमें कुछ शिपमेंट ऐसी कंपनियों से जुड़े थे, जिन्हें वाशिंगटन पहले ही प्रतिबंधित कर चुका है।

पीपी सॉफ्टटेक पर भी करोड़ों डॉलर के कारोबार का आरोप

अमेरिका ने पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड को भी प्रतिबंधित किया है। अमेरिकी आरोप के अनुसार, कंपनी ने जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 2.5 करोड़ डॉलर, यानी लगभग 210 करोड़ रुपये के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। कंपनी के निदेशक और भारतीय नागरिक प्रशांत गर्ग को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है।

प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स पर भी कार्रवाई

चौथी भारतीय कंपनी प्रकृतिस इन्फ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर भी ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े कारोबार का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी ने मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच लगभग 2.5 करोड़ डॉलर के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। अमेरिका का दावा है कि इस कारोबार के कुछ हिस्से ऐसे कारोबारी समूहों से जुड़े थे, जिन्हें पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है।

करीब 119 मिलियन डॉलर के कारोबार पर अमेरिकी नजर

अमेरिकी सरकार द्वारा इन तीन कंपनियों से जुड़े बताए गए आयातों की घोषित रकम को जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 11.9 करोड़ डॉलर, यानी लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। हालांकि, यह रकम अमेरिकी दस्तावेजों में बताए गए कथित लेनदेन पर आधारित है और प्रतिबंधों के पीछे अमेरिका द्वारा लगाए गए आरोपों को दर्शाती है।

भारत से जुड़े कारोबार पर बढ़ सकता है दबाव

ईरान के तेल कारोबार पर शिकंजा कसने की अमेरिकी रणनीति के तहत भारतीय कंपनियों पर हुई यह कार्रवाई दोनों देशों के कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका लगातार ईरान की तेल आय से जुड़े नेटवर्क को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में ईरान के साथ पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार करने वाली अन्य कंपनियां भी भविष्य में अमेरिकी प्रतिबंधों की जांच के दायरे में आ सकती हैं।

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