US Iran Deal : ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है, जिसे ईरान अपनी एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और सैन्य जीत मान रहा है। समझौते की आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ ने एक विशेष बयान जारी किया। इस बयान में दावा किया गया है कि ईरान ने इस समझौते के जरिए अमेरिका और इजरायल पर अपनी रणनीतिक श्रेष्ठता पूरी तरह साबित कर दी है।
काउंसिल के प्रस्ताव के मुताबिक, रविवार शाम को दोनों देशों के बीच युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त करने से संबंधित एक ‘मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) यानी समझौता ज्ञापन के मसौदे को अंतिम रूप दे दिया गया है। ईरानी मीडिया इस बात को लेकर बेहद उत्साहित है और उसका दावा है कि इस नए समझौते के तहत उनके देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी सहूलियतें और आर्थिक लाभ मिलने जा रहे हैं।
समझौते के मुख्य बिंदु और ईरान को मिलने वाली सहूलियतें
ईरानी मीडिया द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक, इस नए समझौते का मुख्य केंद्र बिंदु ईरान पर लगे कड़े वैश्विक आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना है। इसके तहत विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा तुरंत बहाल किया जाएगा, जिसे भविष्य में और बढ़ाया जाएगा। समझौते में सभी विवादित मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम लागू करने और दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की बात कही गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और एनरिच्ड यूरेनियम को ईरान में ही सुरक्षित रखने की मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का एक विशाल ‘मुआवजा फंड’ भी बनाया जाएगा। साथ ही, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) का पूरा प्रबंधन ईरान के हाथों में रहेगा और वह वहां से गुजरने वाले जहाजों से फीस भी वसूल सकेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 60 दिनों की प्रारंभिक बातचीत के दौरान ईरान के 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे, जिसमें से 12 अरब डॉलर शुक्रवार को अंतिम बातचीत शुरू होने से पहले ही ट्रांसफर हो जाएंगे।
दावों की सत्यता पर सस्पेंस और ट्रंप का रुख
हालांकि, ईरानी मीडिया द्वारा किए जा रहे इन बड़े दावों की अभी तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी द्वारा स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। ईरान या अमेरिका में से किसी ने भी इस समझौते (MoU) का अंतिम और आधिकारिक टेक्स्ट सार्वजनिक तौर पर जारी नहीं किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्थिति आधिकारिक ड्राफ्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी, क्योंकि ईरानी मीडिया जिन रियायतों का दावा कर रहा है, वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अब तक की सख्त नीतियों और बयानों से बिल्कुल विपरीत हैं।
पाकिस्तान का आभार और युद्धविराम लागू होने का समय
इस ऐतिहासिक समझौते के मसौदे पर औपचारिक रूप से शुक्रवार, 19 जून को हस्ताक्षर किए जाएंगे। तब तक ईरान ने इस समझौते की शर्तों को मानने की सहमति जताई है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि समझौते के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी सैन्य अभियान आज रात से ही तुरंत और हमेशा के लिए रोक दिए जाएंगे। इसके साथ ही, ईरान के खिलाफ लगी नौसैनिक नाकेबंदी को भी पूरी तरह हटा लिया जाएगा। इस पूरे मामले में ईरान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुनिया को दी बड़ी खुशखबरी
इस ऐतिहासिक समझौते की पहली आधिकारिक घोषणा सोमवार तड़के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की। पीएम शरीफ ने वैश्विक मंच पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों महाशक्तियां लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने के लिए सहमत हो गई हैं। शरीफ ने उम्मीद जताई कि इस शांति समझौते से न केवल ईरान और अमेरिका के संबंध सुधरेंगे, बल्कि पूरे मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बरसों से जारी तनाव और अशांति को हमेशा के लिए खत्म करने का एक नया रास्ता खुलेगा।
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