US Iran Conflict : पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े भीषण मिसाइल हमलों और युद्ध के बढ़ते खतरों ने पूरे वैश्विक समुदाय को चिंता में डाल दिया है। इस संवेदनशील स्थिति के बीच, पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोनों देशों से तत्काल प्रभाव से शत्रुता समाप्त करने और हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील की है। पाकिस्तान का मानना है कि दोनों महाशक्तियों के बीच जारी यह सैन्य आक्रामकता न केवल क्षेत्र की शांति को खतरे में डाल रही है, बल्कि इससे पूरे इलाके में अस्थिरता का एक ऐसा दौर शुरू हो सकता है जिसे संभालना बेहद मुश्किल होगा।
खतरे में पड़ा ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (Islamabad MoU)
इस्लामाबाद में आयोजित एक साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन के दौरान, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस तनाव के गंभीर परिणामों की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि पिछले महीने ही अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (Islamabad MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसका लक्ष्य 60 दिनों के भीतर क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करना था। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। हालांकि, पिछले सप्ताह अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों और उसके जवाब में ईरान द्वारा किए गए पलटवार ने इस शांति प्रक्रिया को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है।
तकनीकी वार्ता रुकने से बढ़ा अनिश्चितता का संकट
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शांति स्थापना की पूरी तकनीकी प्रक्रिया, जो दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का एकमात्र माध्यम थी, फिलहाल बीच में ही रुक गई है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में यह समझौता बेहद गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। सैन्य लामबंदी और एक-दूसरे के ठिकानों पर हमलों ने कूटनीतिक कोशिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। पाकिस्तान का रुख यह है कि यदि सैन्य आक्रामकता का यह दौर जारी रहा, तो मध्य पूर्व में शांति बहाली की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी और इसके परिणाम क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होंगे।
संयम बरतने और कूटनीति पर लौटने की पुरजोर अपील
पाकिस्तान सरकार ने संघर्ष से जुड़े सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया है। ताहिर अंद्राबी ने कहा कि किसी भी प्रकार की आक्रामक सैन्य कार्रवाई से बची-खुची शांति भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। पाकिस्तान का कूटनीतिक रुख यह है कि दोनों महाशक्तियों को हिंसा का मार्ग त्याग कर तुरंत वार्ता की मेज पर वापस लौटना चाहिए। पाकिस्तान इन दोनों देशों को यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि सैन्य शक्ति के प्रदर्शन से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि बातचीत के जरिए ही भविष्य में स्थिरता संभव है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश इस अपील को गंभीरता से लेते हुए सैन्य कार्रवाई रोककर कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ते हैं।
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