US-Iran Conflict : अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सीधा सैन्य तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ नए हमलों की पुष्टि की। अमेरिका के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गतिविधियों के जवाब में की गई, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।
ट्रंप ने ईरान को दी और बड़े हमले की चेतावनी
अमेरिकी हमले के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा संदेश दिया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए संकेत दिया कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है और इससे भी बड़ा हमला किया जा सकता है। उनके बयान से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरानी सेना ने अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी
अमेरिकी कार्रवाई पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेबी ने चेतावनी दी कि अमेरिका को अपने नए हमलों पर पछताना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई करने वालों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इससे दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई का खतरा बढ़ गया है।
ईरान का दावा, अमेरिकी हमलों में चार लोगों की मौत
ईरानी अधिकारियों ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में चार लोगों की मौत हुई है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं। ईरान का कहना है कि घायलों में बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, युद्ध जैसी परिस्थितियों में दोनों पक्षों की ओर से सामने आने वाले आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है।
लारक द्वीप हमले के बाद बढ़ा सैन्य तनाव
दोनों देशों के बीच तनाव रविवार की घटना के बाद और गंभीर हुआ। अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित लारक द्वीप पर कथित तौर पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में सैन्य टकराव को फिर तेज कर दिया।
होर्मुज स्ट्रेट बना अमेरिका-ईरान टकराव का केंद्र
अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें यानी Sea Mines बिछाने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इससे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग पर जहाजों की आवाजाही को गंभीर खतरा हो सकता था। वहीं ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिकी कार्रवाई को अनुचित बताया है।
एक महीने की शांति के बाद फिर आमने-सामने दोनों देश
अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने तक अपेक्षाकृत शांति बनी हुई थी। लेकिन हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बाद दोनों देश फिर सीधे टकराव की स्थिति में आ गए हैं। इसका असर केवल मध्य पूर्व की सुरक्षा पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और निवेशकों के sentiment पर भी दिखाई देने लगा है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर के करीब पहुंची
अमेरिका-ईरान तनाव का तत्काल असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में देखने को मिला। हमलों की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया और कारोबार के दौरान करीब 94-95 डॉलर तक चला गया। लंबे समय से सीमित दायरे में कारोबार कर रहे तेल बाजार में भू-राजनीतिक तनाव ने अचानक अस्थिरता बढ़ा दी।
भारत के लिए महंगा तेल बन सकता है बड़ी चुनौती
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी आने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल, महंगाई, रुपये की स्थिति और शेयर बाजार को प्रभावित कर सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। तेल कंपनियों की लागत और रिफाइनिंग मार्जिन प्रभावित होने की स्थिति में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव की संभावना बढ़ सकती है। इसका असर परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी पड़ सकता है।
महंगा ईंधन बढ़ा सकता है रोजमर्रा की महंगाई
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। माल ढुलाई महंगी होने पर फल, सब्जियां, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा LPG और LNG की लागत पर भी दबाव आ सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो भारतीय परिवारों के घरेलू बजट पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
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