Karnataka News: कर्नाटक में बैंकिंग भर्ती का बदले नियम? कन्नड़ बोलने वालों को प्राथमिकता की मांग

कर्नाटक में बैंकिंग भर्ती को लेकर नया विवाद खड़ा हो सकता है। राज्य के मंत्री ने बैंकों में कन्नड़ जानने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की मांग की है। साथ ही स्थानीय लोगों को कन्नड़ में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। अब नजर केंद्र के रुख पर है।

कर्नाटक में बैंकिंग भर्ती का बदले नियम?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

सितम्बर 2, 2026

Karnataka News: कर्नाटक में भाषा को लेकर चल रही बहस के बीच राज्य सरकार के कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज एस. तंगडागी ने बैंकों को लेकर एक अहम मांग रखी है। उन्होंने राज्य में काम कर रहे सभी बैंकों से ग्राहकों को कन्नड़ भाषा में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में कन्नड़ भाषा का ज्ञान रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की मांग भी की है।

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बैंकिंग सेवाओं में कन्नड़ को मिले प्राथमिकता

शिवराज तंगडागी का कहना है कि कर्नाटक में कारोबार करने वाले बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे स्थानीय लोगों से उनकी भाषा में संवाद करें। उनके मुताबिक, कन्नड़ में बैंकिंग सेवाएं मिलना सिर्फ सुविधा का विषय नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों का भाषाई अधिकार भी है। मंत्री ने बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से स्थानीय भाषा जानने वाले अधिकारियों की नियुक्ति के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इस पहल के लिए कन्नड़ संगठनों और स्थानीय स्तर पर अभियान चलाने वाले लोगों की सराहना भी की। साथ ही उन्होंने दूसरे बैंकों से भी इसी तरह के कदम उठाने की अपील की है।

भर्ती में कन्नड़ जानने वालों को प्राथमिकता की मांग

तंगडागी ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से कर्नाटक में बैंकिंग भर्ती के नियमों में बदलाव करने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य में होने वाली बैंक भर्तियों में कन्नड़ बोलने और समझने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का प्रावधान होना चाहिए। मंत्री के मुताबिक, स्थानीय लोगों को अपने ही राज्य में बैंकिंग जैसी जरूरी सेवाओं का इस्तेमाल करते समय भाषा की समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को रोजगार से आगे बढ़कर कन्नड़ भाषा, अधिकार और स्थानीय सम्मान से जुड़ा विषय बताया।

कर्नाटक में पहले से चल रहा भाषा अभियान

कन्नड़ को प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में बढ़ावा देने की दिशा में कर्नाटक सरकार पहले से कई कदम उठा रही है। राज्य सरकार के कार्यालयों में आधिकारिक पत्राचार, आदेश, फाइल नोटिंग और सार्वजनिक सूचनाओं में कन्नड़ के इस्तेमाल को लेकर निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि केंद्र सरकार, दूसरे राज्यों और न्यायपालिका के साथ होने वाले आधिकारिक संवाद को इन निर्देशों से अलग रखा गया है। कन्नड़ विकास प्राधिकरण ने कुछ विभागों में अंग्रेजी के अधिक इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई है। नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

बेंगलुरु के साइनबोर्ड में भी कन्नड़ पर जोर

भाषा नीति का असर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक भी दिखाई दे रहा है। बेंगलुरु में दुकानों और व्यावसायिक संस्थानों के साइनबोर्ड में 60 फीसदी जगह कन्नड़ भाषा के लिए रखने का प्रावधान लागू किया गया है। विधानसभा से पारित कानून को इस व्यवस्था का आधार बताया गया है। सरकार और कन्नड़ भाषा के समर्थकों का तर्क है कि ऐसे कदमों से स्थानीय भाषा को संरक्षण मिलेगा और लोगों को अपनी भाषा में सेवाएं प्राप्त करने में आसानी होगी।

भाषा नीति पर उठ रहे सवाल भी

हालांकि इस पूरी पहल को लेकर विरोध की आवाजें भी सामने आई हैं। आलोचकों का कहना है कि कन्नड़ को बढ़ावा देना उचित है, लेकिन भाषा के आधार पर रोजगार में प्राथमिकता देने या नियमों को सख्ती से लागू करने से दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों के अवसर प्रभावित नहीं होने चाहिए। ऐसे में कर्नाटक में भाषा और रोजगार का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का अहम विषय बना रह सकता है।

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