Heat Wave Alert: 32 जिलों में आसमान से बरसेगी आग, घर से निकलने से पहले पढ़ लें यह चेतावनी

उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी का कहर शुरू हो गया है। मौसम विभाग (IMD) ने 24 से 26 अप्रैल तक लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी सहित 32 जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। लू और तपिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 23, 2026

Heat Wave Alert: उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सूरज के तेवर तल्ख हो गए हैं। भीषण गर्मी और जानलेवा लू (Heat Wave) ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 24 अप्रैल से 26 अप्रैल तक के लिए राज्य में ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले तीन दिनों में तापमान में और बढ़ोत्तरी होने की संभावना है, जिससे लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

प्रमुख जिलों में भीषण ऊष्ण लहर

मौसम विभाग की सूची के अनुसार, प्रदेश के करीब 32 जिले इस समय ‘हीट वेव’ की चपेट में हैं। मुख्य रूप से बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र और मिर्जापुर में पारा रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है। इसके अलावा चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, बहराइच और लखीमपुर खीरी में भी भीषण गर्मी का प्रकोप रहेगा। अवध और मध्य यूपी के जिलों जैसे लखनऊ, कानपुर नगर व देहात, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी और अयोध्या में भी लू के चलते रेड अलर्ट प्रभावी रहेगा। इन क्षेत्रों में गर्म हवाओं के थपेड़े शारीरिक कष्ट बढ़ा सकते हैं।

स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा

IMD ने आगाह किया है कि इस भीषण ऊष्ण लहर का प्रभाव आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ना तय है। हालांकि स्वस्थ वयस्कों के लिए यह गर्मी किसी हद तक सहनीय हो सकती है, लेकिन नवजात शिशुओं, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों (जैसे हृदय रोग या अस्थमा) से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकती है। रेड अलर्ट की अवधि के दौरान अस्पतालों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में अचानक वृद्धि होने की आशंका है।

किसानों के लिए बढ़ता जोखिम एवं बचाव

मौसम विभाग के अनुसार, लंबे समय तक धूप में काम करने वाले लोगों के लिए यह समय सबसे चुनौतीपूर्ण है। विशेष रूप से औद्योगिक श्रमिक, खनन कर्मी और दिहाड़ी मजदूर जो खुले आसमान के नीचे काम करते हैं, उनमें लू लगने (Heat Stroke) और गंभीर निर्जलीकरण (Dehydration) का सबसे अधिक जोखिम है। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे दोपहर के समय खेतों में काम करने से बचें, क्योंकि लगातार बढ़ती तपिश शरीर की सहनशक्ति को कम कर सकती है।

लू से बचाव के उपाय और सावधानी बरतने के निर्देश

बढ़ते तापमान को देखते हुए विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • दोपहर में बाहर निकलने से बचें: विशेषकर दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच जब धूप सबसे तेज होती है।
  • पहनावा: हल्के रंग के, ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय सिर को टोपी, छतरी या अंगोछे से ढकें।
  • तरल पदार्थ का सेवन: शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी, ओआरएस (ORS), नींबू पानी और लस्सी जैसे पेय पदार्थों का उपयोग करें।

शाम के समय हल्की सिंचाई का सुझाव

तपती धूप का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि फसलों और मवेशियों पर भी पड़ रहा है। मौसम विभाग ने किसानों को सुझाव दिया है कि वे अपनी खड़ी फसलों में नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करते रहें। बागवानी फसलों को बचाने के लिए भी यह तकनीक प्रभावी होगी। इसके साथ ही, पशुपालकों को निर्देश दिया गया है कि वे दोपहर के समय पशुओं को चराने के लिए बाहर न ले जाएं। उन्हें छायादार स्थानों पर रखें और पीने के लिए पर्याप्त शीतल जल उपलब्ध कराएं।