UP Vidhan Sabha Chunav 2027: UP चुनाव 2027 का शंखनाद! जानिए, Lucknow कैंट सीट का पूरा सियासी समीकरण

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का बिगुल बज चुका है। सूबे की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार 175-लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र का सियासी समीकरण बेहद दिलचस्प रहा है।

up vidhansabha

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 23, 2026

UP Vidhan Sabha Chunav 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव का अनौपचारिक बिगुल बज चुका है….भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सभी 403 सीटों पर बूथ सम्मेलनों और ‘चाय पर चर्चा’ के जरिये चुनावी शंखनाद कर दिया है,जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी मैदान में उतर चुकी है।सपा और कांग्रेस में सीट बंटवारे को लेकर रस्साकशी दिख रही है, वहीं भाजपा ने साफ कर दिया है कि वो सहयोगी दलों के साथ मिलकर काम करेगी।

बीजेपी का ‘मिशन 403’

भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सभी 403 विधानसभाओं में एक साथ बूथ सम्मेलन आयोजित करके जमीनी स्तर पर चुनावी बिगुल फूंका है। पार्टी का पूरा जोर दलितों, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और बूथ-स्तरीय समितियों को मजबूत करने पर है।इस बीच चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले और विभिन्न राजनीतिक दलों में टिकट बंटवारे से पहले हम उन हाईप्रोफाइल सीटों का ब्यौरा लेकर आए हैं जो यूपी की सियासत में सत्ता की कुर्सी का रास्ता तय करती हैं।

ब्राह्मण बाहुल्य सीट पर कांटे की टक्कर का पूरा समीकरण

अपनी इस रिपोर्ट में हम सबसे पहले आपके सामने प्रदेश की राजधानी लखनऊ की उन सीटों की रिपोर्ट लाए हैं जहां चुनाव में हमेशा से कांटे की टक्कर देखी जाती रही है।लखनऊ की हाई-प्रोफाइल सीटों में शुमार 175-लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बेहद दिलचस्प सियासी अखाड़ा रहा है। छावनी क्षेत्र को अपने भीतर समेटने वाली यह सीट पारंपरिक रूप से ब्राह्मण मतदाताओं की बहुलता के लिए जानी जाती है।

1957 से शुरू हुए इस सीट के सफर में कांग्रेस के दबदबे से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में बीजेपी के विजय रथ तक, इस सीट ने कई बड़े सियासी मोड़ देखे हैं।आइए नजर डालते हैं 2017 के उस ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव पर, जिसने इस सीट के सारे पुराने समीकरण बदल कर रख दिए।

2017 का ऐतिहासिक महादंगल: जब आमने-सामने थीं दो दिग्गज महिलाएं

2017 का विधानसभा चुनाव लखनऊ कैंट सीट के इतिहास में सबसे चर्चित चुनावों में से एक बन गया। इसकी सबसे बड़ी वजह थी—बीजेपी की तरफ से डॉ. रीता बहुगुणा जोशी जो ठीक चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई थीं और सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ से मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव के बीच की सीधी और कांटे की टक्कर।

2017 विधानसभा चुनाव का सिलसिलेवार ब्यौरा और चुनावी नतीजे

2017 के चुनाव में इस सीट पर प्रमुख पार्टियों के बीच वोटों का गणित कुछ इस प्रकार रहा:

प्रत्याशी का नाम (Candidate)राजनीतिक दल (Party)कुल प्राप्त मत (Votes)मत प्रतिशत (Vote %)
डॉ. रीता बहुगुणा जोशी (विजेता)भारतीय जनता पार्टी (BJP)95,402  50.90%
    अपर्णा यादव (निकटतम         प्रतिद्वंदी)       समाजवादी पार्टी (SP)                 61,606                 32.87%
           योगेश दीक्षित   बहुजन समाज पार्टी (BSP)                 26,036                 13.89%
         वीरेंद्र कुमार शुक्ला      राष्ट्रीय लोक दल (RLD)                  720                 0.38%
नोटा (NOTA)इनमें से कोई नहीं1,1500.62%

 

• जीत का अंतर (Majority): डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने अपर्णा यादव को 33,796 मतों (18.03%) के भारी अंतर से शिकस्त दी।
• कुल मतदान (Turnout): इस सीट पर कुल 1,87,433 मतदाताओं (50.89%) ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

किसने दी बीजेपी को टक्कर? प्रमुख पार्टियों का रुख

समाजवादी पार्टी (अपर्णा यादव): सपा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के परिवार से ताल्लुक रखने वाली अपर्णा यादव पर बड़ा दांव खेला था। चूंकि 2017 में सपा और कांग्रेस का गठबंधन था, इसलिए कांग्रेस ने यहां अपना प्रत्याशी नहीं उतारा और रीता बहुगुणा जोशी के खिलाफ गठबंधन की पूरी ताकत अपर्णा यादव के पीछे झोंक दी गई। अपर्णा ने 32.87% वोट हासिल कर बीजेपी को कड़ी टक्कर दी, लेकिन रीता बहुगुणा जोशी की व्यक्तिगत लोकप्रियता और बीजेपी की लहर के आगे वे टिक नहीं सकीं।

UP Vidhan Sabha Chunav 2027

बहुजन समाज पार्टी (योगेश दीक्षित): इस सीट के ब्राह्मण बाहुल्य होने के पारंपरिक मिजाज को देखते हुए मायावती की बसपा ने भी सोशल इंजीनियरिंग के तहत योगेश दीक्षित को मैदान में उतारा था। हालांकि, वे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में असफल रहे और महज 13.89% वोटों के साथ तीसरे स्थान पर सिमट गए।

2017 के बाद कैसे बदला सियासी समीकरण?

2017 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी को प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया गया।

2019 लोकसभा चुनाव: बीजेपी ने रीता बहुगुणा जोशी को प्रयागराज (इलाहाबाद) लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां वे सांसद चुनी गईं। सांसद बनने के बाद उन्होंने कैंट विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया।

2019 उपचुनाव: खाली हुई इस सीट पर 2019 में उपचुनाव हुए। बीजेपी ने अपने पुराने दिग्गज सुरेश चंद्र तिवारी को टिकट दिया (जिन्होंने 1991 से 2007 तक इस सीट पर लगातार पांच बार जीत का रिकॉर्ड बनाया था)। सुरेश चंद्र तिवारी ने सपा के आशीष चतुर्वेदी और कांग्रेस के दिलप्रीत सिंह को हराकर एक बार फिर बीजेपी का परचम लहराया।

2022 विधानसभा चुनाव: आगे चलकर 2022 के आम चुनाव में बीजेपी ने इस सीट से यूपी के कद्दावर नेता और मौजूदा उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को उतारा, जिन्होंने सपा के सुरेंद्र सिंह गांधी (राजू गांधी) को हराकर बीजेपी के इस अभेद्य गढ़ को बरकरार रखा।