UP Vidhan Sabha Chunav 2027: राजनीति में एक पुरानी कहावत बेहद मशहूर है “दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है, और यूपी का किला फतेह करने के लिए लखनऊ की किलेबंदी को भेदना सबसे जरूरी है.” यूपी की सियासत में राजधानी लखनऊ का राजनीतिक महत्व हमेशा से केंद्र में रहा है. लखनऊ जिले के अंतर्गत कुल 9 विधानसभा सीटें आती हैं, जिन पर कब्जा जमाने के लिए हर राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक देता है. आइए जानते हैं कि लखनऊ की इन सभी 9 विधानसभा सीटों पर जातिगत समीकरण क्या हैं और राजनीतिक दल किस प्रकार अपने वोट बैंक साधने के लिए प्रत्याशियों का चयन करते हैं:
2027 के रण के लिए सभी दलों ने कसी कमर
यूपी की राजनीति में राजधानी लखनऊ की सीटों का हमेशा से विशेष महत्व रहा है। इसी क्रम में लखनऊ जिले के अंतर्गत आने वाली बख्शी का तालाब (BKT) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र (संख्या 169) आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र के पांच प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में शामिल बीकेटी सीट पर राजनीतिक दल अभी से अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
2012 से अस्तित्व में आई यह सीट

आपको बता दे कि, साल 2008 के परिसीमन से पहले लखनऊ के ग्रामीण इलाके की यह महत्वपूर्ण सीट ‘महोना विधानसभा’ के अंतर्गत आती थी. परिसीमन के बाद साल 2012 में इसका नया स्वरूप सामने आया और इसे ‘बख्शी का तालाब’ नाम दिया गया. इस नई सीट का अधिकांश हिस्सा पुरानी महोना विधानसभा और कुछ हिस्सा लखनऊ पूर्व क्षेत्र से मिलकर बना है. यहां शहरी मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के कारण पारंपरिक और स्थानीय जातीय समीकरण ही हर चुनाव में हार-जीत का मुख्य आधार बनते आए हैं.
बीकेटी के सियासी आंकड़े और मजबूत जातीय ताना-बाना
आपकी जानकारी के लिए बताते चले कि, बख्शी का तालाब विधानसभा क्षेत्र के जातीय ताने-बाने की बात करें तो यहां मतदाताओं की संख्या और उनकी जातिगत स्थिति बेहद दिलचस्प है. इस सीट पर लगभग 1,30,000 अनुसूचित जाति (SC), 1,10,000 से अधिक पिछड़ा वर्ग (OBC), करीब 90,000 ब्राह्मण, 70,000 क्षत्रिय, 70,000 मुस्लिम और लगभग 50,000 अन्य जातियों के मतदाता मौजूद हैं। यह भारी-भरकम वोटर बेस हर राजनीतिक दल को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर करता है.
2012 से लेकर 2022 तक किस पार्टी ने मारी बाजी?
2012 विधानसभा चुनाव: नए परिसीमन के बाद हुए इस पहले चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार गोमती यादव ने जीत हासिल कर इस सीट पर कब्जा जमाया था.

2017 विधानसभा चुनाव: बदलाव के दौर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर मैदान में उतरे अविनाश त्रिवेदी ने यहाँ जीत दर्ज कर कमल खिलाया था।

2022 विधानसभा चुनाव: इस रोमांचक मुकाबले में बीजेपी के मौजूदा विधायक योगेश शुक्ला ने समाजवादी पार्टी के गोमती यादव को 27,788 वोटों के भारी अंतर से परास्त कर सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा था.

2022 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव : बख्शी का तालाब
| दल (Party) | उम्मीदवार (Candidate) | कुल वोट (Votes) | वोट प्रतिशत (%) | मत प्रतिशत बदलाव (±%) |
| भाजपा (BJP) | योगेश शुक्ला | 1,47,922 | 46.36% | ▲ 9.92 |
| सपा (SP) | गोमती यादव | 1,20,134 | 37.65% | ▲ 9.32 |
| बसपा (BSP) | सलाउद्दीन ‘मुस्सान’ | 35,167 | 11.02% | ▼ 18.78 |
| कांग्रेस (INC) | ललन कुमार | 9,056 | 2.84% | — |
| नोटा (NOTA) | इनमें से कोई भी नहीं | 2,204 | 0.69% | ▼ 0.18 |
यूपी विधानसभा चुनाव, 2017 : बख्शी का तालाब
| दल | उम्मीदवार | वोट | % |
| भाजपा | अविनाश त्रिवेदी | 96,482 | 36.44 |
| बसपा | नकुल दुबे | 78,898 | 29.8 |
| सपा | गोमती यादव | 74,995 | 28.33 |
| एलकेडी | राजेंद्र प्रसाद यादव | 4,283 | 1.62 |
| नोटा | इनमे से कोई भी नहीं | 2,271 | 0.87 |
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, 2012 : बख्शी का तालाब
| दल (Party) | उम्मीदवार (Candidate) | कुल वोट (Votes) | वोट प्रतिशत (%) |
| सपा (SP) | गोमती यादव | 79,629 | 36.76% |
| बसपा (BSP) | नकुल दुबे | 77,730 | 35.88% |
| कांग्रेस (INC) | सुनीता सिंह | 26,537 | 12.25% |
| भाजपा (BJP) | संजय कुमार सिंह | 9,906 | 4.57% |
| पीईसीपी (PECP) | कायम रज़ा | 7,004 | 3.23% |
2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे और 2027 की सियासी सुगबुगाहट
बख्शी का तालाब विधानसभा सीट, मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. हाल ही में संपन्न हुए 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदलते हुए दिखे, जहां समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आरके चौधरी ने भाजपा उम्मीदवार कौशल किशोर को कड़े मुकाबले में शिकस्त दी. लोकसभा चुनाव के इन परिणामों ने 2027 के विधानसभा रण को और अधिक दिलचस्प बना दिया है.
आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर सत्ताधारी दल जहां अपनी विकास योजनाओं और संगठन के बूते इस सीट पर अपना वर्चस्व बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं विपक्षी दल इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. देखना यह होगा कि 2027 के दंगल में जनता किस पर भरोसा जताती है और बाजी किसके हाथ लगती है.










