UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोट बैंक एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। ऑल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता ने विपक्षी खेमों में हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि AIMIM करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। सवाल यह है कि उनकी मौजूदगी से किस पार्टी का समीकरण बिगड़ेगा और किसकी रणनीति बदलेगी।
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कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता
कांग्रेस के लिए ओवैसी की एंट्री सबसे चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी को डर है कि मुस्लिम वोटों का बंटवारा उसके पहले से कमजोर जनाधार को और सीमित कर देगा। 2022 के चुनाव में भी कांग्रेस को मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा नहीं मिला था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी चिंता जताई थी कि ओवैसी विपक्षी एकजुटता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सपा की रणनीति और उम्मीदें
समाजवादी पार्टी का दावा है कि 2022 में उसे 79-83 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले थे। यही उसका मुख्य सामाजिक आधार है। सपा को उम्मीद है कि AIMIM का असर बढ़ने पर तालमेल या गठबंधन की संभावना बन सकती है। इसी रणनीति के तहत सपा ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को अपने साथ जोड़कर मुस्लिम नेतृत्व का नया चेहरा पेश किया है। अखिलेश यादव ने भी ओवैसी पर तंज कसते हुए कहा था कि वे यूपी आएंगे तो “साइकिल पर बैठकर आएंगे।”
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बसपा के साथ गठबंधन की अटकलें
AIMIM की यूपी इकाई ने संकेत दिए हैं कि बसपा के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि बसपा की ओर से कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सियासी हलकों में इस पर चर्चा तेज है। अगर ऐसा गठबंधन होता है तो इसका सीधा असर सपा और कांग्रेस के मुस्लिम वोट समीकरण पर पड़ेगा।
बीजेपी के लिए भी चुनौती
विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM सीधे तौर पर बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन मुस्लिम बहुल सीटों पर अगर ओवैसी की पार्टी हिंदू प्रत्याशी उतारती है तो बीजेपी की राह मुश्किल हो सकती है।
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AIMIM की पिछली असफलताएं
2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में AIMIM का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। 2022 में पार्टी ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सभी पर हार मिली और 94 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। वोट शेयर महज 0.49 प्रतिशत रहा। यही वजह है कि 2027 में AIMIM के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को “वोट कटवा” की छवि से बाहर निकालना है।
संगठनात्मक तैयारी
ओवैसी ने साफ कहा है कि वे लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। AIMIM ने यूपी में बूथ लेवल मैनेजमेंट पर जोर देना शुरू कर दिया है। पार्टी हर ग्राम पंचायत में ग्राम अध्यक्ष नियुक्त करने और 121 सदस्यीय समितियां बनाने की योजना पर काम कर रही है। इसका मकसद जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क खड़ा करना है।









