UP Politics: यूपी से केरल तक गूंजेगी बसपा, कांशीराम जयंती पर मायावती का चुनावी बिगुल

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपने संस्थापक कांशीराम की जयंती पर उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब जैसे प्रमुख राज्यों में भी बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 12, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में आगामी 15 मार्च को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपने संस्थापक कांशीराम की जयंती पर अपनी सियासी ताकत दिखाने की तैयारी में है। इस अवसर पर मायावती ने पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं। लखनऊ में 92वीं जयंती के मौके पर कांशीराम स्थल पर लगभग दो लाख समर्थकों के जुटने की संभावना जताई जा रही है।

बसपा ने यह शक्ति प्रदर्शन केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल में भी इस अवसर पर रैली और कार्यक्रम आयोजित करेगी। इन राज्यों का चुनावी महत्व भी है, खासकर उन राज्यों में जहां अगले एक साल के अंदर विधानसभा चुनाव होने हैं।

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मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को दिए विशेष निर्देश

बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों और जिला कमेटियों को यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी दी है कि हर रैली और कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद राजस्थान के भरतपुर में एक प्रमुख रैली आयोजित करेंगे। इसी प्रकार हरियाणा और पंजाब में कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल और रामजी गौतम कार्यक्रमों का संचालन करेंगे। महाराष्ट्र में अतर सिंह, तेलंगाना में राजाराम और मध्य प्रदेश में अन्य वरिष्ठ नेता रैलियों का आयोजन कर समर्थकों को जुटाने में मदद करेंगे।

पार्टी का मुख्य उद्देश्य यह है कि जयंती कार्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा भीड़ और समर्थन दिखाया जाए। इसके अलावा, पार्टी इस बात का भी खास ख्याल रख रही है कि किसी भी तरह विपक्ष इसका राजनीतिक लाभ न उठा सके।

विपक्षी दलों की सक्रियता

कांशीराम जयंती को लेकर बसपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) भी सक्रिय हैं। दोनों दल इस दिन अपने-अपने कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में हैं। इसलिए बसपा पूरी तरह सतर्क है और कार्यक्रमों की रणनीति को इस तरह तैयार किया गया है कि पार्टी की सियासी ताकत और समर्थन सबसे प्रभावशाली रूप में दिखे।

विशेषज्ञों का मानना है कि कांशीराम जयंती बसपा के लिए सियासी संदेश देने का अवसर है। पार्टी इसके माध्यम से न केवल अपने समर्थकों को जुटाएगी, बल्कि आगामी चुनावों में भी राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास करेगी।

कांशीराम जयंती पर बसपा का यह शक्ति प्रदर्शन उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों में पार्टी की राजनीतिक पकड़ दिखाने के लिए अहम माना जा रहा है। मायावती और उनके नेतृत्व में पार्टी ने व्यापक स्तर पर रैलियों और कार्यक्रमों की तैयारी कर ली है। विपक्ष की सक्रियता और आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में यह जयंती बसपा के लिए रणनीतिक महत्व की है।

इस बार की जयंती सिर्फ श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि पार्टी अपने संगठित और मजबूत चेहरे को जनता के सामने प्रस्तुत करने की कोशिश करेगी। लखनऊ सहित अन्य राज्यों में जुटी भारी भीड़ और व्यापक कार्यक्रम बसपा की राजनीतिक शक्ति का प्रतीक माने जा रहे हैं।

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