UP Politics: लोकसभा में परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) के पारित न हो पाने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच छिड़ा यह विवाद अब व्यक्तिगत हमलों के चरम स्तर पर पहुंच गया है। भाजपा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘महिला विरोधी’ करार दिया, जिसके जवाब में सपा प्रमुख ने भाजपा के इतिहास को ‘गद्दारी’ से भरा बताकर पलटवार किया है। इस राजनीतिक खींचतान ने आगामी चुनावों से पहले प्रदेश के सियासी तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
भाजपा का डिजिटल हमला
बताते चले कि, उत्तर प्रदेश भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विवादित पोस्ट साझा कर राजनीतिक कटाक्ष और आरोप (Political Satire and Allegations) की झड़ी लगा दी। भाजपा ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ ‘वांटेड’ का कैप्शन लगाया और उन पर संसद में नारी शक्ति के अधिकारों का दमन (Opposition to Women’s Empowerment) करने का आरोप मढ़ा। पोस्ट में पुराने ‘टोंटी विवाद’ को फिर से जीवित करते हुए लिखा गया कि उन्हें आखिरी बार टोंटी चुराते देखा गया था। भाजपा का तर्क है कि सपा प्रमुख महिलाओं के संवैधानिक हितों के खिलाफ खड़े हैं।
https://x.com/BJP4UP/status/2045883871573520452?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2045883871573520452%7Ctwgr%5E22483bc862f5a33adc7114b95e703f76c9ccfb2d%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.amarujala.com%2Flucknow%2Fbjp-calls-akhilesh-tap-thief-sp-president-calls-him-traitor-attacks-x-after-delimitation-bill-falls-2026-04-20
अखिलेश यादव का तीखा पलटवार
भाजपा के हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सत्ता पक्ष की मानसिकता और चुनावी पराजय का भय (Fear of Electoral Defeat) उजागर किया। उन्होंने लिखा कि भाजपा और उनके सहयोगी संगठन अपनी संभावित हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। अखिलेश के अनुसार, भाजपा को PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज की एकजुटता (Unity of PDA Community) से डर लग रहा है। उन्होंने भाजपा पर ‘गद्दारी’ का आरोप लगाते हुए कहा कि इन नकारात्मक शक्तियों ने आजादी से पहले भी देश को धोखा दिया था और आज भी अकूत संपत्ति बटोरने के लिए जनता को गुमराह कर रहे हैं।
परिसीमन बिल पर रार
संसद में परिसीमन बिल का गिरना इस पूरे विवाद की जड़ बना हुआ है। जहां भाजपा इसे महिला आरक्षण और विधायी प्रक्रिया (Women’s Reservation and Legislative Process) में बाधा बता रही है, वहीं सपा इसे पिछड़ों और दलितों के हक पर डाका डालने की साजिश करार दे रही है। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि भाजपा न तो अपने पुराने कृत्यों का हिसाब दे रही है और न ही वर्तमान नीतियों में पारदर्शिता बरत रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष (Ideological conflict between Ruling and Opposition) अब पूरी तरह से ‘डिजिटल वॉर’ में तब्दील हो चुका है, जो 2029 के लोकसभा चुनाव तक और उग्र होने के संकेत दे रहा है।









