Gorakhpur News: गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “बटेंगे तो कटेंगे” बयान पर सियासी माहौल गरमा गया है। सीएम के बयान को लेकर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय जाने वाले मार्गों पर दिग्विजयनाथ डिग्री कॉलेज के छात्र नेता द्वारा सीएम की फोटो के साथ पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टरों में ‘बटेंगे तो कटेंगे’ स्लोगन का उल्लेख था, जो भाजपा समर्थकों द्वारा गोरखपुर में युवा मोर्चा के नेता की ओर से लगाए गए थे।
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सपा का पलटवार: ‘जुड़ेंगे तो बढ़ेंगे’ का संदेश
इस बयान के विरोध में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने पोस्टर वॉर का रास्ता अपनाते हुए “जुड़ेंगे तो बढ़ेंगे” का नारा दिया। सपा ने ठीक भाजपा के पोस्टरों के बगल में अपने पोस्टर लगाए, जिनमें ‘जुड़ेंगे तो बढ़ेंगे’ का संदेश लिखा गया। सपा के इस कदम से राजनीति में तेजी से हलचल मच गई। सपा नेताओं का कहना है कि सीएम का बयान समाज में विभाजन का संदेश देता है, जबकि सपा का उद्देश्य समाज को एकजुट करना और तरक्की की राह पर ले जाना है। सपा की इस पहल ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा बटोरी, जहां समर्थक और विरोधी दोनों दल अपने-अपने तर्क लेकर सामने आए।
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कांग्रेस भी कूदी मैदान में, चौराहे पर लगाए पोस्टर
इस बीच, शनिवार की रात को कांग्रेस ने भी अपने समर्थकों के साथ मैदान में उतरते हुए प्रेस क्लब चौराहे पर अपने पोस्टर लगा दिए। हालांकि, रविवार को प्रशासन ने भाजपा और सपा के होर्डिंग्स हटा दिए, लेकिन कांग्रेस का पोस्टर अभी भी चौराहे पर नजर आ रहा था।
राजनीतिक सरगर्मियों का छाया असर
गोरखपुर में इस पोस्टर वॉर के चलते राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री का बयान हिंदुओं को एकजुट करने का प्रयास है और गोरखपुर में विकास इसके प्रमाण हैं। वहीं, सपा का मानना है कि भाजपा समाज में विभाजन की राजनीति कर रही है, जबकि सपा समाज को जोड़ने के संदेश के साथ आगे बढ़ रही है।
सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने पोस्टर
यह विवाद सोशल मीडिया पर भी छा गया, जहां लोग दोनों दलों के पोस्टरों को लेकर अपनी राय जाहिर कर रहे हैं। भाजपा समर्थकों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ का बयान एकजुटता का प्रतीक है, जबकि सपा समर्थक इसे समाज को जोड़ने की ओर पहल के रूप में देख रहे हैं।
प्रशासन ने हटवाए होर्डिंग्स
बढ़ते विवाद को देखते हुए प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और शनिवार को दोनों दलों के होर्डिंग्स को हटवा दिया। गोरखपुर की सड़कों पर तीन दिनों से यह होर्डिंग चर्चा का विषय बने हुए थे। अब यह विवाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है और आगामी चुनावी राजनीति में इस मुद्दे का असर दिखाई देने की संभावना है।