UP News: मायावती ने विरोधियों पर साधा निशाना, कहा BSP हिंसा में विश्वास नहीं करती

मायावती ने कहा कि BSP राजनीतिक और चुनावी स्वार्थ के लिए धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हिंसा, तोड़फोड़ या झूठे प्रचार का सहारा नहीं लेती।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 11, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शनिवार (11 जुलाई) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण पोस्ट साझा किया। अपने इस संदेश में उन्होंने पार्टी की नीति, कार्यशैली, विपक्षी दलों की साजिशों और आगामी चुनाव की रणनीति पर खुलकर बात की। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीएसपी दूसरी पार्टियों की तरह चुनावी स्वार्थ साधने के लिए धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी या निजी संपत्तियों की तोड़फोड़ और हिंसा का सहारा नहीं लेती। उन्होंने बीएसपी को पूरी तरह कानून पर चलने वाली पार्टी बताया।

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बसपा प्रमुख ने दावा किया कि बीएसपी देश की एकमात्र ऐसी अंबेडकरवादी राजनीतिक शक्ति है, जो ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के मूल सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में अपने शासनकाल को याद दिलाते हुए कहा कि बीएसपी की चार बार रही सरकारों के दौरान जनहित, विकास, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की जो मिसाल पेश की गई थी, वह आज भी बेजोड़ है। उनके शासनकाल में बिना किसी भेदभाव के “कानून द्वारा कानून का राज” स्थापित किया गया था।

दलित समाज को गुमराह करने की कोशिश

मायावती ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के नजदीक आते ही बीएसपी का बढ़ता जनाधार देखकर विरोधी दल पूरी तरह बौखला गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ पार्टियां अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने के लिए चुनिंदा दलित संगठनों और डमी पार्टियों का इस्तेमाल कर रही हैं। इनका एकमात्र उद्देश्य दलित और बहुजन समाज के वोटों को बांटना और उन्हें गुमराह करना है। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों को आगाह करते हुए ऐसी ताकतों से बेहद सावधान रहने की अपील की।

मायावती ने युवाओं और गरीब परिवारों के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब युवा उग्र आंदोलनों, सड़क जाम या हिंसा का हिस्सा बनते हैं, तो उन पर गंभीर पुलिस केस दर्ज हो जाते हैं। जेल जाने और मुकदमों के चक्कर में उनका पूरा भविष्य और करियर बर्बाद हो जाता है। इसी तरह यदि किसी परिवार का मुखिया ऐसे मामलों में उलझता है, तो पूरा परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट में घिर जाता है। मायावती ने साफ किया कि वे नहीं चाहतीं कि बीएसपी का कोई भी कार्यकर्ता या समर्थक किसी कानूनी पचड़े में फंसकर अपना भविष्य खराब करे।

सहारनपुर कांड और संसद से इस्तीफे का दिलाया याद

अपने संघर्षों को रेखांकित करते हुए बीएसपी प्रमुख ने अतीत के प्रसिद्ध सहारनपुर कांड का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब दलितों और पीड़ितों पर अत्याचार हुआ था, तब बीएसपी ने सड़क से लेकर देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) तक उनके हक के लिए जोरदार संघर्ष किया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब तत्कालीन केंद्र सरकार ने संसद में उन्हें दलितों और पिछड़े वर्गों की आवाज उठाने से रोकने का प्रयास किया, तो उन्होंने बिना देर किए राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका यह त्याग साबित करता है कि वे बहुजन समाज के आत्मसम्मान के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।

मान्यवर कांशीराम के मिशन और यूपी चुनाव 2027 पर नजर

अपने संदेश के अंत में मायावती ने पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि बीएसपी की स्थापना बहुजन समाज को शासक वर्ग और एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बनाने के उद्देश्य से की गई थी, ताकि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक परिवर्तन और आत्मसम्मान के मिशन को पूरा किया जा सके। उन्होंने संकल्प दोहराया कि बीएसपी का यह कारवां रुकने वाला नहीं है। उन्होंने चेताया कि यूपी चुनाव 2027 में बीएसपी के इस अभियान को कमजोर करने या प्रभावित करने की जो भी कोशिशें विपक्ष द्वारा की जा रही हैं, वे सभी बाबा साहेब के विचारों के साथ सीधा धोखा हैं।

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