UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक बार फिर अपने पुराने कैडर आधारित अंदाज में लौटती दिख रही है। आगामी विधानसभा चुनावों और सांगठनिक मजबूती के लिए बसपा ने विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान (SIR) के परिणामों का बारीकी से विश्लेषण शुरू कर दिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती स्वयं इस अभियान से हुए नफा-नुकसान की समीक्षा कर रही हैं, और इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य के प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा।
UP Expressway: यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे लॉन्च को तैयार, अब सफर होगा तेज और सुरक्षित
बूथ कमेटियों से मांगी गई ग्रांउड रिपोर्ट
बसपा ने चुनावी तैयारियों को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदेश भर में गठित की गईं 15 हजार बूथ कमेटियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। पार्टी यह जानना चाहती है कि एसआईआर अभियान के दौरान मतदाता सूची में उनके समर्थकों के नाम कितनी मजबूती से दर्ज हुए हैं।
रणनीति का आधार: पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह रिपोर्ट केवल डेटा संग्रह नहीं है, बल्कि आगामी चुनाव की पूरी रणनीति इसी पर टिकी है।
मतदाता सूची पर फोकस: बसपा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी के कैडर वोटर्स और समर्थकों के नाम किसी भी सूरत में मतदाता सूची से बाहर न हों।
टिकट वितरण का नया फॉर्मूला
इस बार बसपा ने टिकट वितरण के लिए एक कड़ा पैमाना तय किया है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि केवल रसूख या आर्थिक मजबूती टिकट की गारंटी नहीं होगी।
पदाधिकारियों की परीक्षा: जिन पदाधिकारियों और जिला प्रभारियों ने एसआईआर अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई है, उन्हें टिकट चयन में प्राथमिकता दी जाएगी।
संभावित उम्मीदवारों की कसौटी: जिन नेताओं को विभिन्न जिलों में प्रभारी बनाया गया था, उनकी रिपोर्ट कार्ड की जांच हो रही है। यदि उनके क्षेत्र में मतदाता पंजीकरण और बूथ मैनेजमेंट संतोषजनक रहा, तभी उनकी दावेदारी पर अंतिम मुहर लगेगी।
मायावती की सीधी निगरानी और प्रदेश अध्यक्ष को निर्देश
बसपा सुप्रीमो मायावती इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों से पारदर्शी रिपोर्ट मंगाई जाए।
प्रभाव वाले क्षेत्रों पर नजर: मायावती ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों की रिपोर्ट मांगी है जहां बसपा का परंपरागत प्रभाव है, लेकिन हालिया आंकड़ों में मतदाताओं की संख्या कम हुई है।
नाम जुड़वाने की प्रक्रिया: जहां भी नाम सूची से छूटे हैं, उन्हें आगामी चरणों में प्राथमिकता के आधार पर जुड़वाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
जागरूकता और भागीदारी का संदेश
ज्ञात हो कि 7 फरवरी 2026 को लखनऊ में हुई बैठक के दौरान ही मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एसआईआर कार्यों में विशेष रुचि दिखाने का निर्देश दिया था। उन्होंने बहुजन समाज से अपील की थी कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची के प्रति जागरूक रहें।









