UP Politics: यूपी 2027 से पहले RSS एक्टिव, दलित-Gen Z वोटरों पर नजर

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक RSS भी संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय है और दलित व Gen Z मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर दिया जा रहा है। भाजपा की उपलब्धियों और विपक्षी राजनीति को लेकर संवाद के जरिए मतदाताओं के बीच अपनी बात रखने की कोशिश की जा रही है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 17, 2026

UP Politics: यूपी के विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलों ने कमर कस ली है। सियासी बिसात पर जाति और धर्म की गोटियां भी बिछनी शुरू हो गई है। प्रदेश में कांग्रेस और बसपा के हाशिए पर जाने के बाद अब सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच होना तय माना जा रहा है। सत्तारूढ भाजपा जहां प्रदेश में तीसरी बार यूपी के सिंहासन पर विराजने की तैयारी में है तो वहीं सपा अपने पीडीए के दांव से भाजपा की राह रोकने में जुटी हुई हैं। इस बीच भाजपा के सहयोग के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आरएसएस ने भी प्रदेश को मथना शुरू कर दिया हैं।

हर विधानसभा सीट पर संघ की सक्रियता

UP Election 2027

संघ सूत्रों के अनुसार आरएसएस बीते तीन महीने से राज्य की हर विधानसभा सीट पर सक्रिय हो गया है। संघ के स्वयंसेवक हर दरवाजे जा कर भाजपा सरकार की उपलब्धियों का बखान तो कर ही रहे है। साथ ही यह भी बता रहे है कि अगर राज्य में सपा सरकार आ गई तो उनके लिए क्या दुश्वारियां सामने आ सकती हैं।

जेन जी और दलित वोटर संघ के निशाने पर

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संघ के टारगेट पर मुख्य रूप से दलित व जेन जी मतदाता है। संघ जेन जी से सीधा संवाद कर रहा है। चूकि अधिकतर जेन जी ने गैर भाजपाई शासन नहीं देखा है तो संघ द्वारा उन्हे राम मंदिर आंदोलन के बारे में पूरी जानकारी दी जा रही हैं। उन्हे बताया जा रहा है कि किस तरह से सपा शासनकाल में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियां चलवाई गई थी। यह भी बताया जा रहा है कि सपा शासनकाल में मुजफ्फरनगर दंगे में हिंदुओं के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई थी। इतना ही नहीं सपा शासनकाल में हिंदुओं के पलायन और महिलाओं के साथ हुए अपराधों की घटनाओं की याद भी दिलायी जा रही हैं।

2024 के झटके के बाद दलितों पर फोकस

संघ 2024 के लोकसभा चुनाव में दलितों के इंडिया गठबंधन में जाने के झटके से भी सजग है। इसीलिए गांव-गांव स्वयंसेवक विपक्षी के झूठे नैरेटिव में नहीं फंसने की सलाह दे रहे है। दलित बस्तियों में स्वयंसेवक बता रहे है कि उनके हितो पर कुठाराधात करने में सबसे ज्यादा मामले जिस जाति या धर्म से आते है। वह ही सपा का आधार वोट बैंक है। इसके लिए वह विभिन्न थानों में दलितों के खिलाफ दर्ज मामलों की बानगी भी पेश कर रहे है।

दरअसल, संघ का मानना है कि यूपी विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता को मानसिक तौर पर इतना सशक्त बना देना है कि विपक्षी नैरेटिव का उन पर असर कम से कम हो। कुल मिलाकर यूपी में भी संघ पश्चिम बंगाल की तर्ज पर काम शुरू कर चुका है।