UP Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 का काउंटडाउन शुरु होने के साथ ही उन्नाव की पुरवा विधानसभा सीट की सियासी हलचल तेज हो गई है. सामान्य सीट होने के कारण के यहां बीजेपी और समाजवादी की सीधी टक्कर संभावना बन रही है. लंबे समय तक सपा के उदयराज यादव का प्रभाव रहा, जबकि 2017 में बसपा के अनिल सिंह ने बाजी पलट दी थी। 2022 में अनिल सिंह भाजपा में शामिल होकर फिर चुनाव जीते। अब 2027 में देखना होगा कि पुरवा की जनता किस चेहरे और किस सियासी समीकरण पर भरोसा करती है.
लंबे समय तक सपा का दबदबा, 2017 में बदला चुनावी समीकरण

बताते चले कि, उन्नाव लोकसभा क्षेत्र की पुरवा विधानसभा सीट सामान्य निर्वाचन के तहत आती है. इस विधानसभा सीट पर लंबे समय तक सपा के उदयराज बतौर विधायक चुने जाते रहे है. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा के अनिल सिंह ने भाजपा प्रत्याशी को हरा कर यह सीट कब्जे में की. इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अनिल सिंह बसपा छोड़ कर भाजपा में आ गये और उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की.
लोन नदी से लेकर सड़क और स्वास्थ्य तक, ये हैं बड़े मुद्दे
90 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण आबादी वाली इस सीट पर लोन नदी का प्रदूषण, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार सड़क व कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे है। इसके अलावा बेरोजगारी भी एक बड़ा मुद्दा है लेकिन डिफेंस कारीडोर से युवाओं में रोजगार मिलने की उम्मीद बढ़ी है। ब्राहम्ण और क्षत्रिय वोट के प्रभावी होने के कारण यूजीसी भी यहां बड़ा मुद्दा बन सकता है।
जातीय समीकरण
इस विधानसभा सीट की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां किसी एक जाति का स्पष्ट वर्चस्व नहीं, बल्कि पिछड़े वर्ग, मुस्लिम, दलित और सवर्ण मतदाताओं के बीच बनने वाला बहुस्तरीय चुनावी समीकरण है। यहां लोग प्रत्याशी के चेहरे पर ज्यादा भरोसा करते है। यही कारण है कि सपा के उदयराज यहां से लगातार जीतते रहे। मौजूदा विधायक अनिल सिंह भी अपना पहला चुनाव बसपा के टिकट पर जीते लेकिन भाजपा में जाने के बावजूद उनका वर्चस्व कायम रहा। इस सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 50 हजार बतायी जाती है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हद्य नारायन दीक्षित यहां प्रमुख राजनीतिक शख्सियत है। हालांकि अब वह चुनाव नहीं लड़ते है। ठाकुर और ब्राह्मण के अलावा पुरवा विधानसभा सीट पर पिछड़े वर्ग ;ओबीसी और दलित मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है। पिछड़े और अल्पसंख्यक मिल कर यहां एक नया और असरदार समीकरण बनाते है।
पुरवा विधानसभा एक नजर में
- विधानसभा संख्या – 167
- आरक्षण स्थिति – सामान्य
- वर्तमान विधायक- अनिल सिंह भाजपा
- विधायक की जाति – क्षत्रिय
- पुरूष मतदाता – 2,03,662
- महिला मतदाता- 1,70, 040
- थर्ड जेंडर – 6
- कुल मतदाता – 3,73, 708
1952 से 2022 तक कई बार बदली पुरवा की सियासी तस्वीर
- 1952 रामधीन सिंह कांग्रेस
- 1957 परमेश्वरी दीन वर्मा निर्दलीय
- 1962 रामधीन सिंह कांग्रेस
- 1967 लखन सिंह जनसंघ
- 1969 दुलारे लाल कांग्रेस
- 1974 गया सिंह कांग्रेस
- 1977 चंद्रभूषण सिंह जनता पार्टी
- 1980 गया सिंह कांग्रेस
- 1985 हद्य नारायन दीक्षित निर्दलीय
- 1989 हद्य नारायन दीक्षित जनता दल
- 1991 हद्य नारायन दीक्षित जनता पार्टी
- 1993 हद्य नारायन दीक्षित सपा
- 1996 उदयराज यादव सपा
- 2002 उदयराज यादव सपा
- 2007 उदयराज यादव सपा
- 2012 उदयराज यादव सपा
- 2017 अनिल सिंह बसपा
- 2022 अनिल सिहं भाजपा
2017 में बसपा की एंट्री, 2022 में BJP के साथ अनिल सिंह की वापसी

प्रदेश में बसपा का प्रभाव सीमित होने के कारण अब यहां सपा और भाजपा में सीधा मुकाबला होने की संभावना है। भाजपा जहां सवर्ण वोटों और ओबीसी तथा दलित वोटों में संेधमारी के साथ मौजूदा विधायक अनिल सिंह के नेटवर्क के बल पर मुकाबला कर रही है तो वही विपक्षी दल सपा अपने पुराने प्रत्याशी उदयराज के जातीय आधार और समीकरणों पर भरोसा कर रही है।
पुरवा में 2027 का चुनाव किसके पक्ष में जाएगा?
पुरवा विधानसभा सीट पर इस बार सिर्फ पार्टी का चुनावी निशान नहीं, बल्कि चेहरा, जातीय समीकरण, स्थानीय पकड़ और विकास के मुद्दे भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। लोन नदी का प्रदूषण, सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार और कनेक्टिविटी जैसे सवालों के बीच 2027 में जनता किसे अपना विधायक चुनती है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।










