Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस बार नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यात्रा में अब तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। आगामी 15 सितंबर से यात्रा का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि यात्रा समाप्त होने तक श्रद्धालुओं की संख्या 60 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि, दूसरे चरण के दौरान यात्रा मार्गों पर मौजूद भूस्खलन जोन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
अप्रैल में शुरू हुई थी चारधाम यात्रा
इस वर्ष चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। चारों धामों के कपाट खुलने के बाद यात्रा ने पूरी गति पकड़ ली। मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम खराब रहने और कई जगहों पर प्राकृतिक चुनौतियां सामने आने के बावजूद यात्रा को पूरी तरह बाधित नहीं होने दिया गया। श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार जारी रही और बड़ी संख्या में तीर्थयात्री चारधाम पहुंचते रहे।
Uttarakhand News: ग्रेड वेतन से मानसून सत्र तक, धामी कैबिनेट की बैठक में
50 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर तक चारधाम यात्रा में 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। यात्रा का संचालन नवंबर तक जारी रहने वाला है। ऐसे में सरकार को अनुमान है कि इस साल कुल श्रद्धालुओं की संख्या 60 लाख के आसपास पहुंच सकती है। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो चारधाम यात्रा के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। पिछले वर्ष पूरे यात्रा सीजन में करीब 51 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए थे। इस लिहाज से इस साल पहले ही पिछले आंकड़े के करीब पहुंचने के बाद रिकॉर्ड टूटने की संभावना बढ़ गई है।
दूसरे चरण में बढ़ेगी श्रद्धालुओं की संख्या
15 सितंबर से यात्रा का दूसरा चरण शुरू होने के बाद तीर्थयात्रियों की संख्या में तेजी आने की संभावना है। मानसून का प्रभाव कम होने के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा की योजना बनाते हैं। इससे बदरीनाथ और केदारनाथ समेत प्रमुख यात्रा मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है।
भूस्खलन वाले क्षेत्रों में बढ़ेगी चुनौती
चारधाम यात्रा के प्रमुख मार्गों पर कई ऐसे स्थान हैं, जहां बारिश के दौरान भूस्खलन की समस्या बनी रहती है। ऋषिकेश से बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले मार्गों पर कई संवेदनशील जोन मौजूद हैं। बदरीनाथ मार्ग पर कमेड़ा, पर्थाटीप, मैठाणा, बांजपुर, विरही, भनेरपानी और हाथी पहाड़ जैसे क्षेत्रों में भूस्खलन की चुनौती सामने आती रही है। इन स्थानों पर पहाड़ से मलबा गिरने के कारण यातायात प्रभावित होने और जाम लगने की आशंका बनी रहती है।
सरकार ने शुरू किए राहत और सुधार कार्य
दूसरे चरण की यात्रा को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर मलबा हटाने और अस्थायी सुरक्षा कार्य शुरू कर दिए हैं। हालांकि, स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालीन निर्माण कार्यों में अभी समय लग सकता है। सरकार का कहना है कि यात्रा मार्गों को यातायात के लिए बहाल रखने पर प्राथमिकता दी जा रही है। जिन स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहां आवश्यक कार्य किए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
रिकॉर्ड के साथ सुरक्षा भी बड़ी प्राथमिकता

चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित और सुचारु यातायात बनाए रखना होगी। एक तरफ 60 लाख श्रद्धालुओं का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ी मार्गों की संवेदनशीलता प्रशासन की परीक्षा लेगी। ऐसे में यात्रा की सफलता केवल रिकॉर्ड संख्या से नहीं, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन से भी तय होगी।
Garhwal University Election: गढ़वाल विवि में छात्रसंघ चुनाव का आगाज,










