Haryana News: भारतीय रेलवे ने कैटरिंग व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए नौ साल पुरानी नीति में बड़ा संशोधन किया है। रेलवे बोर्ड ने कैटरिंग नीति-2017 में संशोधन करते हुए स्टेशनों पर खान-पान के स्टॉल, दूध के काउंटर और जनरल माइनर यूनिट्स (जीएमयू) के आवंटन के नियमों में आमूल-चूल परिवर्तन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब रेलवे स्टेशनों पर स्टॉल लगाने के लिए पुरानी सिफारिशों या पारंपरिक तरीकों का दौर खत्म हो गया है, और इसके स्थान पर अब पूरी तरह से ई-ऑक्शन (ऑनलाइन नीलामी) की पारदर्शी प्रक्रिया को अनिवार्य बना दिया गया है।
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मिल्क स्टॉल और जीएमयू आवंटन के नए नियम

इस नई नीति का सबसे बड़ा प्रभाव मिल्क स्टॉल और विभिन्न श्रेणियों के स्टेशनों पर संचालित होने वाली जनरल माइनर यूनिट्स (जीएमयू) पर पड़ेगा।
रेलवे बोर्ड के नए निर्देशों के मुताबिक, सभी श्रेणियों के स्टेशनों पर मिल्क स्टॉल और ‘ए-वन’, ‘ए’, ‘बी’ तथा ‘सी’ श्रेणी के स्टेशनों पर जीएमयू के आवंटन के लिए केवल ई-ऑक्शन का रास्ता अपनाया जाएगा।
जोनल रेलवे को इन मिल्क स्टालों और जीएमयू के लिए अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार करने को कहा गया है।
इसके लिए बोर्ड द्वारा पूर्व में जारी मानक बोली दस्तावेजों को आधार बनाया जाएगा, जिसमें पात्रता के स्पष्ट मानदंड भी नए परिशिष्ट में निर्धारित कर दिए गए हैं।
जमानत राशि और लाइसेंस शुल्क के कड़े प्रावधान
ई-ऑक्शन प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुचारू रूप से चलाने के लिए रेलवे ने बोली दाताओं हेतु जमानत राशि (EMD) और लाइसेंस शुल्क के नियम बेहद स्पष्ट कर दिए हैं। बोली दाताओं को वार्षिक बोली मूल्य का 10 प्रतिशत हिस्सा बयाना राशि यानी ईएमडी के रूप में ऑनलाइन जमा कराना होगा। नीलामी में सफल रहने वाले बोलीदाता को कुल लाइसेंस शुल्क का 10 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षा जमा (Security Deposit) के तौर पर देना होगा। प्रक्रिया के तहत ईएमडी की राशि को सुरक्षा जमा में समायोजित कर दिया जाएगा, जबकि शेष बची हुई राशि को ई-ऑक्शन के परिणाम आने के दो सप्ताह के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा।
यात्रियों को मिलने वाले लाभ और क्रिस की भूमिका

इस बदलाव का सीधा और सकारात्मक असर रेल यात्रियों पर पड़ेगा। रेलवे की मंशा है कि ठेकेदारी की इस पूरी प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद या मनमानी खत्म हो और छोटे तथा मेहनती कारोबारियों को भी स्टेशनों पर व्यापार करने का निष्पक्ष अवसर मिले। इस पूरी तकनीकी व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए रेलवे बोर्ड ने सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) को ई-ऑक्शन मॉड्यूल में आवश्यक सॉफ्टवेयर और तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दे दिए हैं, ताकि ऑनलाइन बोली प्रणाली को बिना किसी बाधा के लागू किया जा सके।
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