Haryana News: हरियाणा के पंचकूला जिले में मत्स्य पालन एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। प्रगतिशील किसानों और उद्यमियों की पहल से, यहाँ 50 टन की विशाल क्षमता वाले आधुनिक कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए गए हैं। इस बुनियादी ढांचे के विकास ने मछली के सुरक्षित भंडारण, कुशल परिवहन और प्रभावी विपणन का एक मजबूत तंत्र तैयार किया है, जिससे स्थानीय मत्स्य पालकों की आय में गुणात्मक वृद्धि हुई है।
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भंडारण की समस्या का समाधान

कोल्ड स्टोरेज की सुविधा स्थापित होने से पहले, मछली उत्पादकों को अपनी उपज को जल्दी खराब होने के डर से औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी थी। अब, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज के माध्यम से मछली को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यह सुविधा किसानों को बाजार की मांग और मूल्य में उतार-चढ़ाव के अनुसार अपनी उपज बेचने का अवसर देती है, जिससे उन्हें बेहतर मुनाफा मिल रहा है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना
इस सफलता की नींव केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) ने रखी है। वर्ष 2020 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन के क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को आधुनिक बनाना है। यह योजना उत्पादन से लेकर भंडारण, मूल्य संवर्धन (value addition) और विपणन तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करने पर केंद्रित है।
योजना के तहत वित्तीय सहायता का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है। इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति (SC) वर्ग और महिला लाभार्थियों को परियोजना लागत पर 60 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है।सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ मिलता है। इस सरकारी सहायता से किसानों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीक अपनाने और मत्स्य पालन को एक पूर्णकालिक, लाभदायक व्यवसाय के रूप में विकसित करने का प्रोत्साहन मिला है।
प्रशिक्षण और किसानों की नई राह
पंचकूला जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी पहलुओं, सरकारी योजनाओं और अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रियाओं का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण के बाद, कई किसानों ने निजी या पंचायत तालाबों में मछली पालन के साथ-साथ भंडारण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
उदाहरण: गाँव करनपुर के अनिल कुमार और रेखा रानी ने इंटरनेट के माध्यम से योजना की जानकारी प्राप्त की, विभाग से संपर्क कर प्रशिक्षण लिया, और अब वे 50 टन का कोल्ड स्टोरेज सफलतापूर्वक चला रहे हैं।
भारतीय सेना को फ्रोजन मछली की आपूर्ति

पंचकूला में तैयार हुआ कोल्ड चेन नेटवर्क अब स्थानीय बाजार से आगे निकलकर बड़े संस्थागत बाजारों से जुड़ गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण भारतीय सेना को की जा रही आपूर्ति है।
औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area) फेज-1, पंचकूला की रिचा सैनी और आशिमा मेहंदीरत्ता ने दो इकाइयाँ स्थापित की हैं। इन इकाइयों के माध्यम से चंडीमंदिर और सुदूर लेह-लद्दाख में तैनात भारतीय सेना को प्रतिवर्ष लगभग 35 से 45 टन फ्रोजन मछली भेजी जा रही है। यह उपलब्धि न केवल स्थानीय व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रसद (logistics) में भी योगदान दे रही है।
पंगास मछली के भंडारण से बढ़ा मुनाफा

मछली की विभिन्न प्रजातियों के भंडारण से होने वाले लाभ भी स्पष्ट हो रहे हैं। गाँव रत्तेवाली की रीना देवी और प्रेरणा शर्मा ने कोल्ड स्टोरेज स्थापित कर पंगास मछली का स्टॉक किया है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, पंगास मछली की उत्पादन लागत (परिवहन सहित) लगभग 130 रुपये प्रति किलो आती है, जबकि बाजार में यह 230 से 240 रुपये प्रति किलो तक बिकती है। भंडारण की सुविधा ने इन उद्यमियों को बाजार की कीमतों का इंतजार करने और अपनी आय को अधिकतम करने की स्वतंत्रता दी है।
हरियाणा के लिए एक मॉडल
मत्स्य विभाग के उप-निदेशक राजन खोड़ा के अनुसार, पंचकूला में कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार पूरे हरियाणा के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है। उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक सीधी पहुंच के एकीकरण से, मत्स्य पालन अब एक पारंपरिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक संगठित और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय में बदल रहा है। यह पहल किसानों, महिलाओं और नए उद्यमियों के लिए स्वरोजगार के द्वार खोल रही है।
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