Haryana News: हरियाणा के कृषि परिदृश्य में किसानों की आय बढ़ाने और फसल उत्पादन को नई दिशा देने के लिए विश्वविद्यालयों और कृषि विभागों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य के तहत चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि), हिसार के मौलिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के सभागार में 9 और 10 सितंबर को दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला (रबी) का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला में प्रदेशभर से आए कृषि वैज्ञानिक और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एक मंच पर जुट रहे हैं, ताकि रबी सीजन की फसलों की उत्पादकता को लेकर ठोस रणनीतियां तैयार की जा सकें।
कार्यशाला का उद्घाटन और मुख्य अतिथि

इस महत्वपूर्ण दो दिवसीय आयोजन का औपचारिक शुभारंभ कृषि विभाग के निदेशक राजनारायण कौशिक के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के सम्मानित कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज काम्बोज करेंगे। हकृवि के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने इस आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय और प्रशासनिक विभागों का यह संयुक्त प्रयास राज्य के किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि इसमें सीधे मैदानी स्तर की चुनौतियों और वैज्ञानिक समाधानों पर चर्चा की जाएगी।
रबी फसलों की नई तकनीकों और सिफारिशों को अंतिम रूप

कार्यशाला का मुख्य एजेंडा आगामी रबी मौसम में बोई जाने वाली फसलों के लिए अत्याधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक संस्तुतियों को अंतिम रूप देना है। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन और कीटों के नए प्रकोप कृषि के सामने चुनौती बन रहे हैं, वैसे-वैसे नई तकनीकों को किसानों तक समय पर पहुंचाना अनिवार्य हो गया है। वैज्ञानिक और अधिकारी मिलकर उन तौर-तरीकों पर मुहर लगाएंगे, जिन्हें अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर और उच्च गुणवत्ता वाली पैदावार प्राप्त कर सकें।
समस्याओं के समाधान और फील्ड विजिट का महत्व
विभिन्न तकनीकी सत्रों के दौरान रबी फसलों के उत्पादन में आने वाली बाधाओं, बीमारियों और उनके प्रामाणिक समाधानों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रहते हुए, कृषि अधिकारियों को विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक अनुसंधान फार्म का दौरा भी कराया जाएगा। इस दौरान अधिकारियों को दलहनी, तिलहनी, गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों के अलावा बागवानी फसलों व सब्जियों पर चल रहे लाइव परीक्षणों और अनुसंधानों का बारीकी से अध्ययन कराया जाएगा ताकि वे जमीनी स्तर पर इसका सटीक प्रचार-प्रसार कर सकें।
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