UP Election 2027: सफीपुर में किसका पलड़ा भारी? जातीय गणित से विकास तक समझें खेल

UP विधानसभा चुनाव 2027 में उन्नाव की सफीपुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। आरक्षित सीट पर भाजपा लगातार दो चुनाव जीत चुकी है, जबकि सपा वापसी की कोशिश करेगी। मजबूत बसपा प्रत्याशी आने पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। जातीय समीकरण के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, सड़क और जलभराव जैसे मुद्दे अहम रहेंगे।

UP Election 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 9, 2026

UP Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही है. राजनीतिक दल जहां अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे है, वहीं विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों और जातीय गणित भी चुनावी तस्वीर तय करने में अहम भूमिका निभा सकते है. उन्नाव जिले की सफीपुर विधानसभा सीट भी ऐसी ही सीट है, जहां पिछले कुछ चुनावों में सत्ता का समीकरण बदलता है. अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित इसी सीट पर बीजेपी पिछले दो विधानसभा चुनावों से जीत दर्ज कर रही है, जबकि सपा लंबे समय तक यहां मजबूत स्थिति में रही है.

बदलता रहा सफीपुर का सियासी मिजाज

बताते चले कि, सफीपुर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. शुरुआती दौर में इस सीट पर कांग्रेस का प्रभाव रहा. इसके बाद भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, लोकदल और जनता दल जैसे दलों ने भी यहां अपनी पकड़ बनाई. 1993 और 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के बाबूलाल विधायक बने. इसके बाद 2002 से समाजवादी पार्टी की जीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो 2012 तक जारी रहा.

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बदलता रहा सफीपुर का सियासी मिजाज

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, उन्नावं जिले की इस सीट से दो बार यहां के विधायक को प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल होने का मौका मिला. 1969 में अनवार अहमद फिर 2015 में यहां से विधायक सुधीर रावत स्वास्थ्य मंत्री बने. दो बार सरकार में शामिल होने के बाद भी सफीपुर में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षा के अनुरूप सुधार नहीं हुआ. यहां महिलाओं के लिए अलग अस्पताल की मांग पूरी नहीं हो पाई। क्षेत्र के मतदाताओं ने लगभग सभी दलों को मौका दिया लेकिन विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं अपेक्षा के अनुसार पूरी नहीं हो पाईं।

सफीपुर विधानसभा क्षेत्र का ब्योरा

  • कुल मतदाता- 334743
  • पुरुष-185645
  • महिला-149093
  • अन्य- 05
  • साक्षरता दर- 60 फीसदी

विधानसभा क्षेत्र की खासियत

देश-विदेश में विख्यात मखदूम शाह सफी की दरगाह, कस्बा स्थित मोटेश्वर महादेव मंदिर, मां शंकरी देवी का प्राचीन मंदिर प्रमुख है। सफीपुर विधानसभा सीट पर 1951 से 9162 तक कांग्रेस का कब्जा रहा। गोपीनाथ दीक्षित विधायक बने। मतदाताओं ने 1969 और 1974 में बीकेडी पर भरोसा जताया और विधायक चुना। 1989 और 1991 में जनता दल के सुंदरलाल विधायक बने। वहीं 1993 और 1996 में जनता ने भाजपा को भरोसा जताया।

वहीं  2002 में शुरू हुआ सपा की जीत का सिलसिला 2012 के चुनाव में भी कायम रहा। 2017 में इस सीट पर भाजपा की जीत हुई और पहली बार सक्रिय राजनीति में आये चश्मा कारोबारी बंबालाल दिवाकर विधायक चुने गए। बंबालाल ने अपनी जीत का सिलसिला 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जारी रखा और वर्तमान में वह इस सीट से विधायक है।

अब तक के विधायक

  • 1951 मोहनलाल  कांग्रेस
  • 1957 शिवगोपाल  निर्दलीय
  • 1962 गोपीनाथ दीक्षित कांग्रेस
  • 1967 बांगरमऊ में शामिल हो गई थी सफीपुर विधानसभा
  • 1969 अनवार अहमद भारतीय क्रांति दल
  • 1974 सुंदरलाल  भारतीय क्रांति दल
  • 1977 सुंदरलाल  जनता पार्टी
  • 1980 हरप्रसाद  कांग्रेस
  • 1985 सुंदरलाल  लोकदल
  • 1989 सुंदरलाल  जनता दल
  • 1991 सुंदरलाल  जनता दल
  • 1993 बाबूलाल  भारतीय जनता पार्टी
  • 1996 बाबूलाल  भारतीय जनता पार्टी
  • 2002 सुंदरलाल  समाजवादी पार्टी
  • 2007 सुधीर कुमार  समाजवादी पार्टी
  • 2012 सुधीर कुमार  समाजवादी पार्टी

जातीय गणित-

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बदलता रहा सफीपुर का सियासी मिजाज

सफीपुर विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां दलित राजनीति का सबसे बड़ा प्रभाव देखने को मिलता है। दलित (पासी/रावत) इस सीट की सबसे बड़ी ताकत हैं, यहां पासी बिरादरी के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। एक समय में इस सीट पर बसपा बड़ी मजबूत हुआ करती थी। लेकिन बसपा के कमजोर पड़ने के बाद इस सीट पर सपा का कब्जा हुआ और बीते दो चुनावों से यह विधानसभा सीट भाजपा के कब्जे में है। मौजूदा विधायक बंबा लाल दिवाकर धोबी समाज से है लेकिन दलित मतदाताओं में उनकी अच्छी पैठ है। 27 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा के बीच होने की उम्मीद है लेकिन बसपा का मजबूत प्रत्याशी उतरने से यहां लड़ाई त्रिकोणीय हो सकती है।

जातीय समीकरण (अनुमानित)

  • रावत 73 हजार
  • रैदास 67 हजार
  • ब्रह्मण 36 हजार
  • मुस्लिम 31 हजार
  • क्षत्रिय 22 हजार
  • वैश्य 16 हजार
  • लोधी 32 हजार
  • यादव 20 हजार

क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं

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सफीपुर में स्वास्थ्य सेवाएं चुनावी मुद्दा

सफीपुर बड़ी ग्रामीण आबादी वाला विधानसभा क्षेत्र है। गंभीर मरीजों को जिला मुख्यालय जाने की स्थिति ग्रामीण परिवारों के लिए खर्च और समय दोनों बढ़ाती है। लिहाजा सफीपुर में स्वास्थ्य सेवाएं चुनावी मुद्दा बन सकती हैं। क्षेत्र में लंबे समय से डिग्री कालेज की मांग अभी तक पूरी नही हुई है। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत खोदी गई सड़कों की मरम्मत नहीं होने और बिजली की आवाजाही के साथ ग्रामीण इलाकों में खराब सड़क और जलभराव का असर सीधे खेती, बाजार, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर पड़ता है। इसलिए जातीय समीकरण के साथ सड़क और जलनिकासी जैसे छोटे दिखने वाले स्थानीय मुद्दे बूथ स्तर पर बड़ा राजनीतिक असर पैदा कर सकते हैं।