UP Politics: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे करीब आ रहा है, प्रदेश की सियासत में बयानबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा जुबानी हमला बोला है। रालोद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो शेयर करते हुए उनके बयान और व्यवहार को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अखिलेश यादव के वीडियो पर RLD का हमला
बताते चले कि, रालोद की ओर से शेयर किए गए वीडियो के साथ अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा गया कि वीडियो में उनके चेहरे पर अहंकार और सवाल पूछने वालों को चुप कराने का अंदाज दिखाई देता है। पार्टी ने अपने पोस्ट में लिखा कि “आंखों में बसा अहंकार, अंगुली का इशारा, चुप रहने की हिदायत और निशाने पर- कुशवाहा, सैनी, पाल, मौर्य, शाक्य जैसे किसान समाज।”
रालोद ने आरोप लगाया कि वीडियो को देखने के बाद यह सवाल उठता है कि क्या समाजवादी पार्टी नेतृत्व इन समाजों को पढ़ा-लिखा और बुद्धिजीवी नहीं मानता। पार्टी ने सवाल किया कि आखिर सपा प्रमुख इन समाजों को सवाल करने के योग्य क्यों नहीं समझते?
रालोद ने अपने बयान में कुशवाहा, सैनी, पाल, मौर्य और शाक्य जैसे समाजों का विशेष तौर पर जिक्र किया। पार्टी का कहना है कि ये समाज प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं और इन्हें केवल वोट बैंक के तौर पर देखना उचित नहीं है। रालोद ने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति के पीछे एक ऐसी मानसिकता है, जिसमें किसान समाजों को कमतर समझने की कोशिश की जाती है। पार्टी ने कहा कि किसी भी समाज के लोगों की शिक्षा, समझ या राजनीतिक जागरूकता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
रालोद-सपा विवाद में ‘मानसिकता’ पर हमला
आपको बता दे कि, राष्ट्रीय लोक दल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सपा नेतृत्व की कथित मानसिकता पर भी सवाल उठाए। रालोद का आरोप है कि किसान समाजों को सिर्फ वोट बैंक समझना, उन्हें “एबीसीडी सिखाने” का अहंकार दिखाना और सवाल पूछने पर उन्हें कम पढ़ा-लिखा या कम बुद्धि वाला बताना निंदनीय है। पार्टी ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी यदि किसानों और किसान जातियों को किसी से कमतर समझने की मानसिकता मौजूद है तो यह चिंता का विषय है। रालोद ने इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।
UP Election 2027 में वोट से जवाब देने की बात
रालोद ने अपने बयान में आगे कहा कि ऐसी मानसिकता का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जा सकता है और इसका सबसे बड़ा माध्यम वोट है। पार्टी ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता के पास अपने प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों को जवाब देने की ताकत होती है। रालोद ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में ही यह तय होगा कि कुशवाहा, सैनी, पाल, मौर्य और शाक्य जैसे समाज खुद को कितना जागरूक और राजनीतिक रूप से समझदार मानते हैं और अपने कथित अपमान का जवाब किस तरह देते हैं।
2027 चुनाव से पहले RLD और समाजवादी पार्टी के रिश्तों में बढ़ी खटास
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले रालोद और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक तल्खी लगातार बढ़ती नजर आ रही है। दोनों दलों के बीच बयानबाजी अब सोशल मीडिया तक पहुंच चुकी है। रालोद के इस ताजा हमले ने यूपी की सियासत में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, रालोद के आरोपों और अखिलेश यादव के वीडियो को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि सपा इस हमले का किस अंदाज में जवाब देती है और UP Election 2027 की चुनावी राजनीति में यह विवाद आगे कितना बड़ा मुद्दा बनता है।










