UP Cabinet Meeting: यूपी में ओला-उबर के लिए नए नियम लागू; अब बिना रजिस्ट्रेशन नहीं दौड़ेंगी टैक्सियां, जानें कैबिनेट के बड़े फैसले

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में ओला (Ola) और उबर (Uber) जैसी एग्रीगेटर कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। कैबिनेट बैठक में पास हुए प्रस्ताव के अनुसार, अब इन कंपनियों को यूपी के परिवहन विभाग में पंजीकरण कराना होगा, जो 5 वर्ष के लिए मान्य रहेगा।

UP Cabinet Decisions

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 10, 2026

UP Cabinet Meeting: उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। बैठक में कुल 30 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनका असर परिवहन, संपत्ति पंजीयन, आवास योजना और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा। खासतौर पर ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति घोषणा और कई शहरों के विकास से जुड़े प्रस्ताव भी पास किए गए हैं।

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Ola-Uber जैसी कंपनियों के लिए नया नियम

UP Cabinet Meeting
यूपी में ओला-उबर के लिए नए नियम लागू

कैबिनेट बैठक में मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इस फैसले के बाद अब ओला, उबर और अन्य एग्रीगेटर कंपनियों को उत्तर प्रदेश में सेवाएं संचालित करने के लिए अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यह रजिस्ट्रेशन पांच वर्षों के लिए मान्य रहेगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों को भी राज्य में लागू किया जाएगा। अब किसी भी एग्रीगेटर टैक्सी को बिना आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी किए संचालित नहीं किया जा सकेगा।

कंपनियों को लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 5 लाख रुपये का शुल्क देना होगा। इसके अलावा वाहन से जुड़े दस्तावेज, जैसे फिटनेस, ड्राइवर का मेडिकल परीक्षण और पुलिस वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होगा। हालांकि यह नियम तीन पहिया ऑटो और दो पहिया वाहनों पर लागू नहीं किया जाएगा।

संपत्ति पंजीयन को लेकर बड़ा बदलाव

कैबिनेट ने स्टाम्प और पंजीयन विभाग से जुड़े एक अहम फैसले को भी मंजूरी दी है। अब किसी भी संपत्ति की बिक्री से पहले विक्रेता की पहचान खतौनी के आधार पर सत्यापित की जाएगी। नया नियम लागू होने के बाद विभाग संपत्ति के मालिकाना हक की जांच करेगा और यदि मालिकाना अधिकार की पुष्टि नहीं होती है तो उस संपत्ति का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा। साथ ही संपत्तियों पर स्टाम्प शुल्क सर्किल रेट के आधार पर ही लगाया जाएगा। नगर निगम सीमा के अंदर आने वाली संपत्तियों पर 2 प्रतिशत विकास शुल्क भी अलग से देना होगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना में बदलाव

कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। इसके तहत पहले जो 6.50 लाख रुपये की सीमा तय थी, उसे बढ़ाकर अब 9 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा कांशीराम योजना के तहत बने आवासों पर भी बड़ा फैसला लिया गया है। इन आवासों से अवैध कब्जेदारों को हटाया जाएगा और उनकी मरम्मत तथा रंगाई-पुताई कराकर उन्हें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के जरूरतमंद परिवारों को आवंटित किया जाएगा।

सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति पर निगरानी

कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नियम लागू करने का निर्णय लिया है। अब सभी कर्मचारी और अधिकारी हर वर्ष अपनी चल और अचल संपत्ति की जानकारी देंगे। यदि कोई कर्मचारी 6 महीने के मूल वेतन से अधिक का निवेश या संपत्ति खरीदता है, तो उसकी जांच की जाएगी। जांच में कोई गड़बड़ी मिलने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

कई शहरों के विकास को मिली मंजूरी

कैबिनेट ने अयोध्या में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके लिए सदर तहसील के वशिष्ठ कुंड स्थित नजूल भूमि को नगर निगम अयोध्या को निशुल्क हस्तांतरित किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण और नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत कई शहरों के विकास के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। इसमें बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ जैसे जिलों को शामिल किया गया है।

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