एग्रीगेटर टैक्सी संचालन हेतु नए दिशानिर्देश
बताते चले कि, कैबिनेट ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 में संशोधन को हरी झंडी दे दी है। अब ओला और उबर जैसी एग्रीगेटर कंपनियों को उत्तर प्रदेश में अपना संचालन जारी रखने के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। यह पंजीकरण 5 वर्ष की अवधि के लिए वैध रहेगा। भारत सरकार द्वारा एक्ट में किए गए हालिया संशोधनों को भी राज्य में आत्मसात किया गया है।
एग्रीगेटर कंपनियों को लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 5 लाख रुपये का शुल्क देय होगा। बिना वैध फिटनेस, मेडिकल जांच और वेरिफिकेशन प्रक्रिया के कोई भी टैक्सी संचालित नहीं की जा सकेगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि ये कड़े नियम फिलहाल तिपहिया ऑटो और टू-व्हीलर एग्रीगेटर्स पर लागू नहीं होंगे।
संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता
स्टाम्प एवं पंजीयन विभाग में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अब किसी भी प्रॉपर्टी की बिक्री के समय विक्रेता की पहचान ‘खतौनी’ के माध्यम से सत्यापित की जाएगी। विभाग अब संपत्ति के मालिकाना हक (Ownership) की गहन जांच करेगा और पुष्टि के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इसके अतिरिक्त, स्टाम्प शुल्क का निर्धारण अब केवल सर्किल रेट के आधार पर ही किया जाएगा। नगर निगम सीमा के भीतर आने वाली संपत्तियों के लिए खरीदारों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त विकास शुल्क (Development Charge) भी देना होगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना की लागत सीमा में वृद्धि
शहरी गरीबों के लिए एक बड़ी घोषणा करते हुए कैबिनेट ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत आवास निर्माण की व्यय सीमा को 6.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 9 लाख रुपये कर दिया है। इसके साथ ही, कांशीराम आवास योजना के तहत अवैध कब्जों को हटाने का निर्देश दिया गया है। खाली कराए गए आवासों का नवीनीकरण और रंगाई-पुताई कराकर उन्हें अब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के पात्र परिवारों को आवंटित किया जाएगा।
सरकारी कर्मचारियों हेतु चल-अचल संपत्ति घोषणा का नया नियम
प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के लिए अब उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रतिवर्ष अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करना होगा। यदि कोई कर्मचारी अपने 6 महीने के मूल वेतन से अधिक का निवेश करता है या संपत्ति का आहरण (Withdrawal) करता है, तो शासन स्तर पर उसकी जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अयोध्या में खेल बुनियादी ढांचे का विस्तार
विस्तारीकरण योजना के तहत बरेली, वाराणसी, उरई, चित्रकूट, बांदा, प्रतापगढ़, गाजीपुर और मऊ जैसे शहरों के समग्र विकास के लिए विशेष बजट स्वीकृत किया गया है। वहीं, धार्मिक और वैश्विक पर्यटन नगरी अयोध्या में मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत एक आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इसके लिए सदर तहसील के वशिष्ठ कुंड स्थित नजूल भूमि को नगर निगम अयोध्या को नि:शुल्क हस्तांतरित करने की अनुमति दी गई है।










