UNSC: PoK हिंसा पर भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब, संयुक्त राष्ट्र में जमकर सुनाया

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में PoK हिंसा और कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा पलटवार किया। भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देते हुए PoK में हालात और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया। आखिर UNSC में क्या हुआ, भारत ने क्या कहा और इसका असर क्या होगा? जानिए पूरी खबर।

UNSC

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 24, 2026

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UNSC : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आयोजित एक खुली बहस के दौरान भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। भारत ने आरोप लगाया कि वहां रहने वाले लोगों के बुनियादी अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं का लगातार उल्लंघन हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संगठन बनाने का अधिकार और अन्य लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इन मुद्दों की ओर आकर्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मानवाधिकारों के हनन पर जताई चिंता

राजदूत हरीश परवथानेनी ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। उनके अनुसार यह केवल कुछ अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही एक व्यापक व्यवस्था का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि वहां नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन नहीं किया जा रहा है। भारत ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिए जाने की आवश्यकता बताई।

‘लंबे समय से जारी है दमन’

भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जो स्थिति दिखाई दे रही है, वह दशकों से जारी नीतियों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वहां की परिस्थितियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं को सीमित करने की प्रवृत्ति लंबे समय से बनी हुई है। उनके अनुसार यह केवल PoK तक सीमित नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में भी लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।

पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति का भी किया उल्लेख

अपने वक्तव्य में राजदूत परवथानेनी ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां विभिन्न राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी, विपक्षी दलों से जुड़े विवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर उठते प्रश्न लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चिंता पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के कारण पाकिस्तान की लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा होती रही है।

‘आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत’

भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अन्य देशों के खिलाफ आरोप लगाने के बजाय अपनी आंतरिक चुनौतियों पर ध्यान दे। राजदूत हरीश परवथानेनी ने कहा कि पाकिस्तान को अपने देश के भीतर मौजूद समस्याओं का समाधान खोजने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने के बजाय वास्तविक मुद्दों पर गंभीरता से काम करना अधिक आवश्यक है।

धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर धार्मिक प्रतीकों या भावनात्मक मुद्दों का उपयोग राजनीतिक उद्देश्य से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच का उपयोग रचनात्मक संवाद और वैश्विक सहयोग के लिए होना चाहिए, न कि विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए। भारत ने इस संदर्भ में जिम्मेदार और तथ्य आधारित चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया।

जम्मू-कश्मीर पर भारत का स्पष्ट रुख

राजदूत हरीश परवथानेनी ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह भारत की संवैधानिक और कानूनी स्थिति है, जिसे भारत लगातार स्पष्ट करता आया है। उनके अनुसार इस विषय पर भारत का रुख पहले भी स्पष्ट था और आगे भी वही रहेगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

अवैध कब्जे का मुद्दा भी उठाया

भारत ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा वास्तविक लंबित मुद्दा पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र से संबंधित है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत का मानना है कि इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वास्तविक तथ्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा इस संबंध में उसका रुख स्पष्ट और स्थिर है।

संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारत का दोहराया संदेश

संयुक्त राष्ट्र में दिए गए इस बयान के माध्यम से भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा। साथ ही भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर पर उसकी संवैधानिक स्थिति अपरिवर्तित है। भारत का कहना है कि क्षेत्रीय शांति, लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान के लिए वास्तविक तथ्यों पर आधारित संवाद और जिम्मेदार रवैया आवश्यक है।

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