Ghazwa-e-Hind Conspiracy : गजवा-ए-हिंद के लिए बन रहा था खूनी प्लान, एटीएस की गिरफ्त में 4 गुनहगार

उत्तर प्रदेश एटीएस ने एक बार फिर देश को बड़ी साजिश से बचा लिया है! 'गजवा-ए-हिंद' के नाम पर युवाओं को भड़काने और आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने वाले 4 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। क्या ये किसी बड़े आत्मघाती हमले की तैयारी में थे? जानिए एटीएस की इस गुप्त कार्रवाई का पूरा सच।

Ghazwa-e-Hind Conspiracy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 3, 2026

Ghazwa-e-Hind Conspiracy : उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत देश विरोधी गतिविधियों में शामिल चार युवकों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। ये आरोपी भारत में ‘गजवा-ए-हिंद’ की विचारधारा को थोपने और देश के विभिन्न हिस्सों में आगजनी कर दहशत फैलाने का खतरनाक मंसूबा पाले हुए थे। एटीएस की समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक बड़ी त्रासदी टल गई है, क्योंकि पकड़े गए आरोपी भीड़भाड़ वाले इलाकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की फिराक में थे।

गैस सिलेंडर के ट्रकों और रेलवे स्टेशनों को दहलाने की थी योजना

जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि आरोपियों ने देश में व्यापक स्तर पर तबाही मचाने की योजना बनाई थी। उनका मुख्य लक्ष्य गैस सिलेंडरों से लदे ट्रकों में आग लगाना था ताकि बड़े धमाके हों और जन-धन की हानि हो। इसके अलावा, आतंकियों के इस गिरोह ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे व्यस्त इलाके चारबाग रेलवे स्टेशन के बाहर भी आगजनी कर आतंक पैदा करने का पूरा खाका तैयार कर लिया था।

पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर सक्रिय था गिरोह

एटीएस को खुफिया जानकारी मिली थी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए एक भारतीय गिरोह लगातार पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में है। यह गिरोह देश के महत्वपूर्ण संस्थानों और प्रतिष्ठित राजनीतिक हस्तियों की रेकी कर रहा था। आरोपियों द्वारा जुटाई गई गोपनीय जानकारी, फोटो और गूगल लोकेशन्स पाकिस्तानी आकाओं को भेजी जा रही थी, ताकि भविष्य में उन पर बड़े हमले किए जा सकें।

फंडिंग का तरीका: ‘क्यूआर कोड’ के जरिए मिलता था इनाम

पकड़े गए आरोपियों के काम करने का तरीका बेहद शातिर था। ये आरोपी पहले छोटे स्तर पर आगजनी की घटनाओं को अंजाम देते थे और उनका वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर्स को भेजते थे। इन वीडियो को ‘सबूत’ के तौर पर पेश करने के बाद, पाकिस्तानी हैंडलर इन्हें डिजिटल माध्यमों और क्यूआर कोड (QR Code) के जरिए पैसे भेजते थे। इस काम के लिए साकिब उर्फ डेविड को गिरोह का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है, जिसके साथ उसका ग्रामीण साथी अरबाब भी शामिल था।

दहशत फैलाने के लिए कट्टरपंथी विचारधारा का सहारा

यह गिरोह टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों से ओसामा बिन लादेन, कश्मीर मुजाहिद्दीन और फतुल्लाह गोरी जैसे कट्टरपंथी प्रचारकों से प्रेरित था। इनका मुख्य उद्देश्य धर्म के आधार पर उन्माद फैलाना और वाहनों को जलाकर जनता के मन में डर का माहौल पैदा करना था। एटीएस ने इनके पास से ज्वलनशील पदार्थ, 7 मोबाइल फोन, आधार कार्ड और आपत्तिजनक सामग्री वाले 24 पंपलेट भी बरामद किए हैं।

रेकी और नेटवर्क का विस्तार

साकिब और अरबाब ने पैसों के लालच में विकाश गहलावत और लोकेश जैसे युवकों को भी अपने साथ जोड़ा था। इन लोगों ने गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में महत्वपूर्ण सरकारी भवनों और रेलवे सिग्नल बॉक्स की रेकी की थी। एटीएस अब इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और उनके स्थानीय संपर्कों की तलाश में जुटी है ताकि देश की सुरक्षा को पूरी तरह पुख्ता किया जा सके।

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