UP Assembly Special Session: आरक्षण लागू करो या गद्दी छोड़ो! विधानसभा के बाहर सपा विधायकों का तीखा प्रहार

उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र से पहले लखनऊ में सियासी पारा चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के विधायकों ने महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर विधान भवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। जहां सरकार विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है, वहीं सपा इसे भाजपा का चुनावी स्टंट बता रही है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 30, 2026

UP Assembly Special Session: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज महिला आरक्षण कानून (Women’s Reservation Act) को लेकर घमासान छिड़ गया है। गुरुवार (30 अप्रैल 2026) को विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र के आयोजन से ठीक पहले समाजवादी पार्टी के विधायकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विधान भवन परिसर में स्थित चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने जुटे सपा नेताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बाद में सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया।

विधान भवन पर प्रदर्शन और आरक्षण लागू करने की मांग

बताते चले कि, सपा विधायकों ने हाथों में ‘33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करो’ लिखे बैनर लेकर महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक अधिकारों (Women Empowerment and Constitutional Rights) की वकालत की। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे विधायकों ने स्पष्ट किया कि वे आरक्षण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि इसके लागू होने में हो रही देरी के खिलाफ हैं। विधान भवन के गेट के सामने हुए इस प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ा, लेकिन सपा सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे।

भाजपा पर परिसीमन की राजनीति करने का आरोप

आपको बता दे कि, सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने संवाददाताओं से बातचीत में सत्ताधारी दल की चुनावी रणनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर जनता को धोखा दे रही है। यादव के अनुसार, भाजपा निर्वाचन क्षेत्रों का अपनी सुविधानुसार क्षेत्रीय परिसीमन करना चाहती है, इसीलिए इस कानून को तुरंत प्रभावी नहीं बनाया जा रहा है। उन्होंने भाजपा को ‘महिला विरोधी’ करार देते हुए लोहिया और मुलायम सिंह यादव के आदर्शों का हवाला दिया।

वर्ष 2027 के चुनावों में महिला कोटा लागू करने की चुनौती

प्रदर्शन में शामिल अमिताभ बाजपेई ने विधायी प्रक्रिया और कानून कार्यान्वयन (Legislative Process and Implementation) पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि जब संसद ने 2023 में ही महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था, तो उसे अब तक ठंडे बस्ते में क्यों रखा गया है? बाजपेई ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2027) को अनिवार्य रूप से महिला आरक्षण कानून के दायरे में कराया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं को उनका वास्तविक हक मिल सके।

संसद की सर्वसम्मति और विपक्ष की घेराबंदी का विरोध

विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव और सपा विधायक कमाल अख्तर ने संसदीय सर्वसम्मति और राजनीतिक शुचिता (Parliamentary Consensus and Political Integrity) का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सदन में इस बिल का समर्थन किया था, लेकिन भाजपा अब नारी शक्ति के नाम पर भ्रम फैला रही है। उनका तर्क है कि सरकार जानबूझकर देरी कर रही है ताकि इसका लाभ केवल आगामी चुनावों में लिया जा सके, जबकि जमीनी स्तर पर महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने की नियत साफ नहीं है।

निंदा प्रस्ताव और चुनावी एजेंडे पर आर-पार की जंग

आज का विशेष सत्र काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं क्योंकि योगी सरकार विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव (Censure Motion against Opposition) लाने की तैयारी में है। सरकार का तर्क है कि लोकसभा में कुछ बाधाओं के कारण यह पूर्ण रूप से प्रभावी नहीं हो सका और इसके लिए विपक्ष जिम्मेदार है। भाजपा का उद्देश्य 2027 के चुनावों से पहले सपा और अन्य दलों को ‘महिला विरोधी’ साबित करना है, वहीं सपा ने सड़क से सदन तक (Protest from Streets to Assembly) अपनी आक्रामकता दिखाकर सरकार के इस एजेंडे को विफल करने की रणनीति बनाई है।