Pak-Afghan Conflict: संयुक्त राष्ट्र की दखल, महासचिव की चेतावनी- ‘तत्काल थमे यह जंग वरना तबाह होगा क्षेत्र’

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती सैन्य हिंसा ने संयुक्त राष्ट्र की नींद उड़ा दी है। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने और तुरंत हमले रोकने की अपील की है। क्या यूएन का यह हस्तक्षेप दक्षिण एशिया को एक विनाशकारी युद्ध से बचा पाएगा या यह शांति की आखिरी कोशिश है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 28, 2026

Pak-Afghan Conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और सीमा पर जारी भारी गोलाबारी ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस स्थिति को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए दोनों देशों से तत्काल युद्ध रोकने की अपील की है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि हिंसा में यह वृद्धि न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रही है, बल्कि निर्दोष नागरिक आबादी पर भी इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने स्पष्ट किया कि कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है और दोनों देशों को अपने मतभेदों को मेज पर बैठकर सुलझाना चाहिए।

मानवीय संकट की आहट: तोरखम बॉर्डर पर हमलों से बढ़ा खतरा

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय अधिकारियों ने विशेष रूप से पूर्वी अफगानिस्तान के तोरखम बॉर्डर क्रॉसिंग पर हुई घटनाओं पर चिंता जताई है। यहाँ एक ट्रांजिट और रिसेप्शन सेंटर के पास सैन्य गतिविधियों की खबरें मिली हैं, जहाँ बड़ी संख्या में विस्थापित लोग शरण लेते हैं। यूएन ने संघर्षरत दोनों पक्षों को उनके अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) के तहत दायित्वों की याद दिलाई है। दुजारिक ने जोर देकर कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और नागरिक बुनियादी ढांचों (स्कूल, अस्पताल, रिसेप्शन सेंटर) की रक्षा करना किसी भी स्थिति में अनिवार्य है।

अफगानिस्तान की दयनीय स्थिति: 2.2 करोड़ लोगों को सहायता की जरूरत

महासचिव के प्रवक्ता ने इस बात को रेखांकित किया कि अफगानिस्तान पहले से ही दशकों के संघर्ष, भीषण गरीबी, सूखे और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। वर्तमान में अफगानिस्तान की लगभग आधी आबादी, यानी करीब 2.2 करोड़ लोग, मानवीय सहायता पर निर्भर हैं। यदि यह लड़ाई और अधिक खिंचती है या बढ़ती है, तो हताहतों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होगी और पहले से ही कमजोर पड़ चुकी मानवीय सहायता प्रणाली पूरी तरह चरमरा जाएगी। संयुक्त राष्ट्र इस स्थिति पर अपने सहयोगियों के साथ बारीकी से नजर रख रहा है।

फंडिंग की भारी कमी: यूएन ने विश्व समुदाय से मांगी आर्थिक मदद

युद्ध के बीच राहत कार्यों को जारी रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस वर्ष की मानवीय आवश्यकता योजना के लिए आवश्यक 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर में से अब तक केवल 11 प्रतिशत (181 मिलियन डॉलर) ही प्राप्त हुए हैं। यूएन ने वैश्विक समुदाय से अपील की है कि वे इस मानवीय त्रासदी को रोकने के लिए आगे आएं। गुटेरेस ने कहा कि क्रॉस-बॉर्डर झड़पों के बीच राहत कर्मियों का काम करना कठिन होता जा रहा है, और पर्याप्त फंडिंग के बिना लाखों लोगों तक भोजन और दवाइयां पहुँचाना असंभव होगा।

मध्यस्थता की उम्मीद: ईरान और यूएई के प्रयासों का स्वागत

इस खूनी संघर्ष को रोकने के लिए ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता के प्रयासों की महासचिव ने सराहना की है। पाकिस्तान द्वारा “ओपन वॉर” की घोषणा के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र का राजनीतिक मिशन (UNAMA) काबुल और इस्लामाबाद दोनों पक्षों के संपर्क में है। यूएन ने उम्मीद जताई है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय शक्तियों के हस्तक्षेप से दोनों पक्ष शत्रुता त्याग कर शांति की राह चुनेंगे। किसी भी बड़े युद्ध को टालने के लिए अब कूटनीतिक सक्रियता को बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।

Read More: Iran-Israel युद्ध पर अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया,भारतीय दूतावास ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर