UN Afghanistan Mission: संयुक्त राष्ट्र की अवर महासचिव जनरल रोजमेरी डिकार्लो ने हाल ही में अफगानिस्तान की एक अहम यात्रा पूरी की। काबुल में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने डी फैक्टो अफगान अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय राजनयिक समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान में गहराते मानवीय संकट और विशेष रूप से महिलाओं की बिगड़ती स्थिति को वैश्विक मंच पर प्रमुखता से उठाना था।
अफगान महिलाओं और नागरिक समाज से संवाद
अपनी यात्रा के दौरान रोजमेरी डिकार्लो ने अफगान महिलाओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से सीधे मुलाकात की। इन बैठकों में महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी पर विस्तार से चर्चा हुई। डिकार्लो ने महिलाओं की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय महिला अधिकारों की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ा है।
शिक्षा और काम पर लगी पाबंदियों पर चिंता
डी फैक्टो अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में अवर महासचिव जनरल ने महिलाओं की शिक्षा और रोजगार पर लगी कठोर सीमाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से बाहर करना अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ है। वर्तमान स्थिति में अफगान महिलाओं को पुरुष अभिभावक या महरम के बिना लंबी दूरी की यात्रा की अनुमति नहीं है, जिसे उन्होंने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया।
दोहा प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव पर जोर
रोजमेरी डिकार्लो ने अफगान अधिकारियों को दोहा प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ रचनात्मक संवाद बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यदि अफगानिस्तान वैश्विक समुदाय का सम्मानित हिस्सा बनना चाहता है, तो उसे अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाना होगा। इसके साथ ही मानवीय सहायता को बिना किसी बाधा के सीमा पार पहुंचाने और ट्रांजिट की सुविधा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
तालिबान शासन में महिलाओं की दयनीय स्थिति
तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति लगातार कमजोर होती गई है। अधिकांश सरकारी नौकरियों से महिलाओं को हटा दिया गया है और NGO तथा संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी गतिविधियों में उनकी भागीदारी पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने के लिए महिला डॉक्टरों और नर्सों को सीमित छूट दी गई है।
सार्वजनिक जीवन से महिलाओं का बहिष्कार
महिलाओं के लिए पार्क, जिम और स्पोर्ट्स क्लब जैसे सार्वजनिक स्थानों में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। सार्वजनिक रूप से निकलते समय महिलाओं के लिए हिजाब या बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसका उल्लंघन करने पर सख्त सजा का प्रावधान है। मीडिया क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की संख्या भी काफी घट गई है, जिससे उनकी आवाज और प्रतिनिधित्व कमजोर हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र की एकजुटता और भविष्य की उम्मीद
रोजमेरी डिकार्लो ने संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत अफगान महिला कर्मचारियों के साहस और योगदान की खुले तौर पर सराहना की। उन्होंने नागरिक समाज के साथ घंटों चर्चा कर मानवाधिकारों की स्थिति को समझा। डी फैक्टो अधिकारियों ने भविष्य में भी संयुक्त राष्ट्र के साथ संवाद और सहयोग जारी रखने की सहमति जताई, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव की उम्मीद बनी हुई है।










