Ukraine Russia Ceasefire: ट्रंप की ‘शांति योजना’ पर रूस-यूक्रेन की पहली सीधी बात, जानें अबू धाबी का हाल

अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक पहली त्रिपक्षीय वार्ता शुरू हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप की 28-सूत्रीय शांति योजना पर चर्चा के लिए दोनों पक्षों के शीर्ष वार्ताकार मेज पर हैं। रूस की डोनबास की मांग और यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी के बीच क्या कोई बीच का रास्ता निकलेगा?

Ukraine-Russia Peace Talks

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 24, 2026

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Ukraine Russia Ceasefire: फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए आक्रमण के बाद पहली बार एक ऐतिहासिक कूटनीतिक हलचल देखी गई है। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में शुक्रवार को यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक शुरू हुई। यह वार्ता शनिवार को भी जारी रहेगी। वैश्विक राजनीति के लिहाज से यह बैठक इसलिए खास है क्योंकि पहली बार युद्ध के तीनों मुख्य पक्ष एक मेज पर बैठे हैं। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने पहले दिन की चर्चा के बाद सावधानी बरतते हुए कहा कि परिणामों पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगले दौर की बातचीत ही समझौते की दिशा तय करेगी।

जमीन का विवाद और पुतिन की शर्तें: डोनेत्स्क क्षेत्र पर फंसा पेंच

इस बातचीत में सबसे जटिल मुद्दा क्षेत्रीय अखंडता का है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट मांग रखी है कि यूक्रेन को डोनेत्स्क क्षेत्र के उस 20 प्रतिशत हिस्से पर अपना दावा छोड़ना होगा, जो वर्तमान में यूक्रेनी नियंत्रण में है। रूस इस क्षेत्र को अपनी सामरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य मानता है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति जेलेंस्की का रुख कड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यूक्रेन अपनी उस भूमि का बलिदान नहीं देगा जिसकी रक्षा उसके सैनिकों ने दो वर्षों से अधिक समय तक जान देकर की है। रूस फिलहाल क्रीमिया, डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया सहित यूक्रेन के लगभग 1.14 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा जमाए बैठा है।

सुरक्षा गारंटी और नाटो की सदस्यता: शांति के लिए रूस की मुख्य शर्तें

शांति समझौते के मार्ग में ‘नाटो’ (NATO) की सदस्यता एक बड़ा रोड़ा बनी हुई है। पुतिन की मुख्य शर्त है कि यूक्रेन भविष्य में कभी भी नाटो में शामिल होने की कोशिश नहीं करेगा और वहां कोई विदेशी सैनिक तैनात नहीं होंगे। इसके बदले में, जेलेंस्की अमेरिका से ठोस ‘सुरक्षा गारंटी’ की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में रूस फिर से हमला न कर सके। जेलेंस्की के अनुसार, सुरक्षा गारंटी के दस्तावेज तैयार हैं और अब केवल संसदों की मंजूरी और हस्ताक्षरों का इंतजार है।

डोनाल्ड ट्रम्प की मध्यस्थता: ‘जल्द खत्म होगा युद्ध’ का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस त्रिपक्षीय वार्ता में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। दावोस में जेलेंस्की के साथ एक घंटे की गुप्त बैठक के बाद ट्रम्प ने सकारात्मक संकेत दिए। ट्रम्प ने कहा कि पुतिन और जेलेंस्की दोनों ही अब इस लंबे खिंचते युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं। उन्होंने यूक्रेन के लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि बिना बिजली और हीटिंग के कड़ाके की ठंड में रहना अमानवीय है। ट्रम्प ने जेलेंस्की को एक ‘बहादुर नेता’ बताया और उम्मीद जताई कि युद्ध खत्म करने का समझौता काफी करीब है।

भविष्य की रणनीति: आर्थिक बहाली और कैदियों की अदला-बदली पर चर्चा

अबू धाबी की इस बैठक में केवल सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण पर भी चर्चा हुई। जेलेंस्की को उम्मीद है कि अमेरिका यूक्रेन की आर्थिक बहाली में बड़ी मदद करेगा। इसके अलावा, सैन्य स्तर पर युद्धविराम, सैनिकों की वापसी और युद्धबंदियों की अदला-बदली जैसे मानवीय मुद्दों पर भी रूपरेखा तैयार की जा रही है। पुतिन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मुख्य शर्तें मानी जाती हैं, तो वे खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसे मोर्चों पर अपनी सेना को स्थिर कर सकते हैं, जिससे नए हमले रुक जाएंगे।

युद्ध की विभीषिका: 2022 से अब तक का भयावह सफर

फरवरी 2022 से जारी इस जंग ने अब तक लाखों जिंदगियां तबाह कर दी हैं। जून 2023 के आंकड़ों तक लगभग 80 लाख लोग देश छोड़कर शरणार्थी बन चुके हैं। हाल ही में अलास्का में पुतिन और ट्रम्प के बीच हुई मुलाकात ने इस त्रिपक्षीय वार्ता की जमीन तैयार की थी। अब पूरी दुनिया की निगाहें अबू धाबी पर टिकी हैं, जहां शनिवार की बातचीत यह तय करेगी कि क्या 2026 में यूरोप में शांति की बहाली होगी या जंग का यह सिलसिला अभी और लंबा खिंचेगा।

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