Udhayanidhi Stalin On Sanatan: उदयनिधि स्टालिन ने फिर दिया सनातन विरोधी बयान; बीजेपी का तीखा पलटवार

तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर 'सनातन धर्म' को खत्म करने की बात कहकर विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने इसे समाज को बांटने वाली विचारधारा बताया। जवाब में बीजेपी ने उनके बयान को 'जहरीली बकवास' करार देते हुए उनकी तुलना राहुल गांधी से की है। राज्य में इस मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है।

Udhayanidhi Stalin On Sanatan

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 12, 2026

Udhayanidhi Stalin On Sanatan: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक और धार्मिक मतभेदों का टकराव चरम पर पहुंच गया है। द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ नेता और विधायक दल के नवनिर्वाचित नेता उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में ‘सनातन धर्म’ के खिलाफ एक विवादास्पद बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री के इस संबोधन ने विपक्षी गलियारों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे सीधे तौर पर बहुसंख्यक समाज की भावनाओं पर प्रहार बताया है।

विधानसभा में सनातन धर्म के उन्मूलन की मांग

मंगलवार, 12 मई 2026 को सदन को संबोधित करते हुए पूर्व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन ने अपने रुख को दोहराया। उन्होंने तर्क दिया कि सनातन विचारधारा और प्राचीन धार्मिक व्यवस्था (Sanatan Ideology and Ancient Religious System) ने समाज को बांटने का काम किया है, इसलिए इसे जड़ से खत्म कर देना चाहिए। उदयनिधि के अनुसार, जो व्यवस्था लोगों के बीच भेदभाव पैदा करती है, उसका बने रहना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके इस वक्तव्य ने सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज कर दिया है।

बीजेपी का पलटवार

उदयनिधि के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी प्रवक्ता सी.आर. केसवन ने इसे ‘नफरत फैलाने वाली राजनीति’ करार दिया। केसवन ने स्टालिन की तुलना कांग्रेस नेता राहुल गांधी से करते हुए कहा कि वे तमिलनाडु में विभाजनकारी राजनीति और नफरत भरे भाषण (Divisive Politics and Hate Speech) को बढ़ावा दे रहे हैं। बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि जिस तरह राहुल गांधी ने सेंगोल और राम मंदिर का अपमान किया, उसी तरह उदयनिधि भी बार-बार हिंदू आस्थाओं को ठेस पहुँचा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि DMK का इतिहास हमेशा से दीपावली की शुभकामनाओं और धार्मिक प्रतीकों के विरोध का रहा है।

हिंदू विरोधी बयानबाजी और बीमारियों से तुलना का पुराना विवाद

आपको बता दे कि, यह पहली बार नहीं है जब उदयनिधि ने ऐसी टिप्पणी की है। इससे पहले उन्होंने चेन्नई के एक सम्मेलन में सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी जानलेवा बीमारियों से की थी। तब उन्होंने कहा था कि सनातन का केवल विरोध काफी नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह मिटाना जरूरी है। इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने भी कड़ी टिप्पणी की थी। जस्टिस एस. श्रीमति ने एक एफआईआर रद्द करते हुए स्पष्ट कहा था कि उदयनिधि के ऐसे बयान ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी (Category of Hate Speech) में आते हैं और इन्हें संदर्भ के साथ देखा जाना चाहिए।

तमिलनाडु के राजकीय प्रतीकों का अपमान

केसवन ने डीएमके नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें तमिलनाडु के गौरवशाली इतिहास को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि तमिलनाडु का राजकीय प्रतीक (State Emblem of Tamil Nadu) स्वयं एक मंदिर के गोपुरम को प्रदर्शित करता है। भाजपा का दावा है कि डीएमके सांसद और पूर्व मंत्री हिंदू धर्म को वैश्विक खतरा बताकर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का अपमान कर रहे हैं। केसवन के अनुसार, तमिलनाडु की जनता अपनी धार्मिक भावनाओं के इस तरह के खुले अनादर को कभी माफ नहीं करेगी और आने वाले समय में इसका उचित जवाब देगी।

विपक्ष के नेता चुने गए उदयनिधि

राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो 59 विधायकों वाली DMK ने उदयनिधि स्टालिन को अपना विधायक दल का नेता चुन लिया है, जिससे वे विधानसभा में मुख्य विपक्षी चेहरा बन गए हैं। वहीं दूसरी ओर, अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके (TVK) ने गठबंधन के सहयोगियों (Alliance Partners) जैसे कांग्रेस और वामपंथियों के साथ मिलकर 120 विधायकों का समर्थन जुटाया है और बहुमत के जादुई आंकड़े (118) को पार कर सरकार बना ली है। अब देखना यह होगा कि उदयनिधि का यह आक्रामक रुख विपक्ष की भूमिका में उनकी पार्टी को कितनी मजबूती प्रदान करता है।