Twisha Sharma Death Case: मध्य प्रदेश के त्विषा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का शिकंजा अब पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ पर पूरी तरह कस चुका है। सीबीआई को आरोपियों की रिमांड मिलते ही पूछताछ की जो कड़क रूपरेखा तैयार की गई है, उसने आरोपियों के होश उड़ा दिए हैं। शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को भोपाल की विशेष अदालत में पेश किया गया था, जहाँ करीब डेढ़ घंटे (90 मिनट) तक मां-बेटे दोनों कटघरे में खड़े रहे।
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पूर्व जज के कानूनी तजुर्बे पर ही सीबीआई का पहला तीखा प्रहार
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीबीआई के आला अफसरों ने पूछताछ की शुरुआत में ही पूर्व जज गिरिबाला सिंह के कानूनी अनुभव को ढाल बनाकर पहला तीखा सवाल दागा। “आप खुद एक सम्मानित जज रही हैं और कानून की हर एक बारीकी से अच्छी तरह वाकिफ हैं। अगर आपकी तरफ से कोई गलती या कसूर नहीं था, तो पुलिस द्वारा एफआईआर (FIR) दर्ज किए जाने से पहले ही आपने अदालत में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी क्यों लगा दी थी? इसके साथ ही आपने अपने बेटे समर्थ को क्यों फरार होने को कहा?”
इस अप्रत्याशित और तीखे सवाल को सुनकर पूर्व जज गिरिबाला सिंह कुछ देर के लिए पूरी तरह खामोश हो गईं। इसके बाद उन्होंने बेहद दबी और मायूस आवाज़ में अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि, “हाँ, यह हमसे बहुत बड़ी भूल हुई।” उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि अग्रिम जमानत की यह जल्दबाजी उन पर ही संदेह के घेरे को सबसे ज्यादा पुख्ता और मजबूत कर देगी।
3D सीन रिक्रिएशन
इस हाई-प्रोफाइल मौत मामले की तह तक जाने के लिए सीबीआई अब हर एक पहलू का बेहद उन्नत वैज्ञानिक और फोरेंसिक विश्लेषण (Forensic Analysis) करने जा रही है। मुख्य आरोपी समर्थ ने पूर्व में बयान दिया था कि उसने त्विषा को फंदे से नीचे उतारा था और उसकी मां गिरिबाला ने फंदे की गांठ खोली थी। अब इस थ्योरी की सच्चाई परखने के लिए सीबीआई निम्नलिखित कदम उठाने जा रही है, सीबीआई दोनों आरोपियों को पूर्व जज के उसी भोपाल स्थित सरकारी निवास पर लेकर जाएगी, जहाँ 3D कैमरों की मदद से मैपिंग की गई है। वहां मृतका त्विषा शर्मा के वजन के बराबर (लगभग 80 किलो) का एक डमी पुतला फंदे पर लटकाकर पूरी घटना को हूबहू दोहराया जाएगा।
रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को सीबीआई के सामने डमी लिगेचर (फंदे की रस्सी या कपड़ा) की गांठ को बिल्कुल उसी तरीके से खोलकर दिखाना होगा, जैसा उन्होंने घटना वाली रात को खोलने का दावा किया है। जिस बेल्ट से फंदा लगाने की कहानी बताई जा रही है, सीबीआई की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैब (CFSL) में उसकी मजबूती की कड़ाई से जांच की जाएगी। विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि क्या वह बेल्ट वाकई 80 किलो का वजन उठाने में सक्षम थी या फिर हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोई साजिश रची गई थी।
अलग-अलग कमरों से लेकर आमने-सामने तक
अदालत में सीबीआई के सरकारी वकील ने साफ किया कि मुख्य आरोपी समर्थ लगातार अपने बयानों को बदल रहा है और जांच में कतई सहयोग नहीं कर रहा है। बयानों में आ रहे इसी विरोधाभास को खत्म करने के लिए जांच एजेंसी ने पूछताछ का एक त्रि-स्तरीय (Three-layer) चक्रव्यूह तैयार किया है।
सबसे पहले मां गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ को अलग-अलग कमरों में बैठाकर एकांत में गहन पूछताछ की जाएगी और उनके बयानों को बिना किसी फेरबदल के लिखित में दर्ज किया जाएगा। इसके बाद दोनों के बयानों का गहनता से वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा कि घटना की रात दोनों की टाइमिंग और लोकेशन आपस में मैच हो रही है या नहीं।
जिन-जिन सवालों के जवाबों में अंतर या विरोधाभास पाया जाएगा, उन सभी संदिग्ध बिंदुओं पर मां और बेटे को एक-दूसरे के आमने-सामने बैठाया जाएगा और सच उगलवाया जाएगा। इस वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक रणनीति से त्विषा की मौत का असली राज जल्द ही बेनकाब होने की उम्मीद है।
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