Mumbai Ganesh Chaturthi: देशभर में आज से गणेश चतुर्थी का पावन पर्व शुरू हो गया है। अगले 11 दिनों तक शहरों से लेकर गांवों तक गणपति बप्पा की भक्ति और उत्सव का माहौल देखने को मिलेगा। महाराष्ट्र, खासकर मुंबई का गणेशोत्सव अपनी भव्यता और अनोखी परंपराओं के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। लालबागचा राजा के साथ-साथ माटुंगा का GSB सेवा मंडल भी अपने विशेष गणपति उत्सव के लिए चर्चा में रहता है। इस बार यहां बप्पा का दिव्य श्रृंगार, सुरक्षा व्यवस्था और करोड़ों रुपये का बीमा खास आकर्षण बना हुआ है।
GSB गणपति की 24 फीट ऊंची प्रतिमा और स्वर्ण श्रृंगार

बताते चले कि, माटुंगा स्थित GSB सेवा मंडल को देश के सबसे समृद्ध गणपति मंडलों में गिना जाता है। इस वर्ष यहां करीब 24 फीट ऊंची गणपति प्रतिमा स्थापित की गई है। बप्पा के सिंहासन, मुकुट और आभूषणों को बेहद भव्य तरीके से सजाया गया है। गणपति प्रतिमा के श्रृंगार में करीब 66 किलो शुद्ध सोने के आभूषणों का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, करीब 335 किलो चांदी से अन्य आभूषणों और पंडाल की सजावट को भव्य रूप दिया गया है। सोने और चांदी से सजा यह मंडप भक्तों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
66 किलो सोना और 335 किलो चांदी से सजा गणपति पंडाल
आपको बता दे कि, GSB गणपति की खासियत सिर्फ सोने-चांदी के आभूषणों तक सीमित नहीं है। पूरे पंडाल की सजावट में भी भव्यता और पारंपरिक कलाकारी का खास ध्यान रखा गया है। बप्पा का मुकुट, सिंहासन और आभूषण जब रोशनी में चमकते हैं तो पूरा मंडप एक अलग ही आध्यात्मिक आभा से भर उठता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर बप्पा के इस अनोखे स्वरूप के दर्शन करना चाहते हैं।
₹703 करोड़ का बीमा कवर
GSB सेवा मंडल के गणपति केवल पांच दिनों के लिए विराजमान होते हैं, लेकिन इन पांच दिनों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद व्यापक रहती है। इस वर्ष मंडल ने गणपति प्रतिमा, सोने-चांदी के आभूषणों, पंडाल और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए करीब ₹703 करोड़ का ऑल-रिस्क बीमा कवर लिया है। यह बीमा सिर्फ बप्पा के कीमती आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं और सेवा में जुटे लोगों की सुरक्षा को भी इसमें शामिल किया गया है।
श्रद्धालुओं से सेवादारों तक लाइफ और हेल्थ कवर
GSB गणपति उत्सव में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बीमा व्यवस्था को व्यापक रखा गया है। इसमें दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के साथ सेवादारों, रसोइयों, सुरक्षा गार्डों और अन्य कर्मचारियों के लाइफ एवं हेल्थ कवर को भी शामिल किया गया है। करोड़ों रुपये के इस बीमा कवर ने इस बार GSB गणपति को एक बार फिर देशभर की सुर्खियों में ला दिया है।
GSB गणपति मंडप में DJ नहीं, वैदिक मंत्रों की गूंज

मुंबई में इस साल करीब 2,700 सार्वजनिक गणपति मंडल सजाए गए हैं, लेकिन GSB सेवा मंडल का उत्सव अपनी सात्विक परंपराओं के लिए अलग पहचान रखता है। यहां तेज संगीत या DJ की जगह वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों पर जोर दिया जाता है। मंडप का वातावरण लगातार मंत्रों की गूंज से भक्तिमय बना रहता है। यहां दो विशेष हवन कुंड बनाए गए हैं, जहां पांच दिनों तक वैदिक विधि-विधान के साथ अखंड हवन किया जाता है।
24 घंटे अखंड हवन और वैदिक अनुष्ठान की परंपरा
GSB गणपति मंडप में पांच दिनों तक लगातार धार्मिक अनुष्ठान चलते हैं। प्रकांड वैदिक ब्राह्मण मंत्रोच्चार के साथ हवन करते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ गणपति दर्शन का अवसर नहीं, बल्कि धार्मिक वातावरण में समय बिताने और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करने का भी मौका होता है। यही वजह है कि GSB सेवा मंडल का गणेशोत्सव भव्यता के साथ-साथ अपनी धार्मिक और सात्विक पहचान के लिए भी जाना जाता है।
70 साल पुरानी तुलादान परंपरा, अन्नदान से जुड़ी आस्था
GSB गणपति उत्सव की सबसे खास परंपराओं में से एक तुलादान भी है। यह परंपरा करीब 70 साल पुरानी बताई जाती है। मान्यता के अनुसार जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी होती है, तो वह अपने बच्चे को विशेष तराजू में बैठाकर उसके वजन के बराबर चावल, दाल और अन्य खाद्य सामग्री का दान करता है। इस तरह आस्था सीधे सेवा और अन्नदान से जुड़ जाती है।
तुलादान से जुटा अनाज गरीबों के महाप्रसाद में होता है इस्तेमाल
तुलादान के जरिए एकत्र होने वाले अनाज का इस्तेमाल जरूरतमंदों और गरीबों के लिए महाप्रसाद तैयार करने में किया जाता है। यानी बप्पा के दरबार में चढ़ाई गई श्रद्धा आगे चलकर सेवा का माध्यम बनती है। यही परंपरा GSB सेवा मंडल के गणेशोत्सव को सिर्फ वैभव और भव्यता तक सीमित नहीं रहने देती, बल्कि इसे सामाजिक सेवा और धार्मिक आस्था से भी जोड़ती है।
भक्ति, सेवा और वैभव का संगम है GSB गणपति उत्सव

मुंबई का GSB गणपति उत्सव इस बार फिर अपने स्वर्ण-रजत श्रृंगार, ₹703 करोड़ के बीमा कवर, वैदिक अनुष्ठानों और करीब सात दशक पुरानी सेवा परंपरा के कारण चर्चा में है। 66 किलो सोने और 335 किलो चांदी से सजे बप्पा का दिव्य स्वरूप जहां श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है, वहीं तुलादान और अन्नदान की परंपरा इस उत्सव को सेवा और आस्था का अनूठा संगम बना रही है।










