Delhi Violence: देश की राजधानी दिल्ली का तुर्कमान गेट इलाका मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात (6-7 जनवरी) को अखाड़ा बन गया। नगर निगम (MCD) द्वारा फैज-ए-इलाही दरगाह के पास किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
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बुलडोजर एक्शन और भारी पुलिस बल की तैनाती
बताते चले कि, 6 और 7 जनवरी की रात प्रशासन पूरी तैयारी के साथ तुर्कमान गेट पहुंचा। यहां फैज-ए-इलाही दरगाह के पास अवैध रूप से बने बारात घर और डायग्नोस्टिक सेंटर को ढहाने के लिए दर्जनों बुलडोजर तैनात किए गए थे। सुरक्षा के लिहाज से इलाके में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की भारी टुकड़ियों को तैनात किया गया था। जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया और देखते ही देखते शांति भंग हो गई।
भीड़ का हमला और पुलिस की जवाबी कार्रवाई
अतिक्रमण हटाने का विरोध कर रही भीड़ अचानक पुलिस पर हमलावर हो गई। उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर भारी पत्थरबाजी शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से एक बारगी अफरा-तफरी मच गई। जवाब में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कम से कम 4-5 दर्जन आंसू गैस के गोले छोड़े। तंग गलियों में घुसकर पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ा और स्थिति पर काबू पाने की कोशिश की।
वर्तमान स्थिति और प्रशासनिक बयान
डीसीपी (सेंट्रल) एन वॉल्सन ने बताया कि प्रशासन ने इस कार्रवाई के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था। पुलिस को उम्मीद नहीं थी कि भीड़ इस कदर हिंसक हो जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कुछ शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैदी के कारण मामला शांत करा लिया गया। फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा बल फ्लैग मार्च कर रहे हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश और सर्वे
यह पूरा विवाद रामलीला मैदान की जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा है। एक एनजीओ की शिकायत के बाद अक्टूबर 2025 में L&DO, DDA और MCD ने एक संयुक्त सर्वे किया था। इस जांच में सामने आया कि लगभग 2512 स्क्वायर फीट की पीडब्ल्यूडी (PWD) जमीन और फुटपाथ पर अवैध निर्माण किया गया है। मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने 12 नवंबर 2025 को एमसीडी को निर्देश दिया कि तीन महीने के भीतर इस अतिक्रमण को हटाया जाए।
कानून व्यवस्था और जन-सुनवाई
प्रशासन का कहना है कि उन्होंने कोर्ट के आदेशानुसार सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया था। इसके बावजूद, कार्रवाई के दौरान बाधा डालने की कोशिश की गई। पुलिस अब पत्थरबाजी करने वाले संदिग्धों की पहचान कर रही है ताकि कानूनी कार्रवाई की जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने का अभियान जारी रहेगा।










