UP News: हादसे के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में मिलेगा इलाज, योगी सरकार ने बनाया बड़ा प्लान

उत्तर प्रदेश में यूपीटीईएन के जरिए ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को एक नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। योजना के तहत 173 ट्रॉमा एवं इमरजेंसी यूनिट और 1,200 ALS एंबुलेंस नेटवर्क से जुड़ेंगी। सरकार का लक्ष्य हर साल 10 से 12 हजार लोगों की जान बचाना और इमरजेंसी रिस्पांस टाइम को 30-50% तक कम करना है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 6, 2026

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीजों को जल्द इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत करने की तैयारी तेज हो गई है। सरकार यूपीटीईएन यानी उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क को एक ऐसे तकनीक आधारित आपात चिकित्सा नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है, जिसका लक्ष्य दुर्घटना या गंभीर बीमारी के बाद शुरुआती 60 मिनट यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में मरीज को सही उपचार तक पहुंचाना है।

ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक और स्ट्रोक सेवाएं एक नेटवर्क से जुड़ेंगी

यूपीटीईएन के तहत प्रदेश में बिखरी हुई ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को एक साझा नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। योजना के मुताबिक प्रदेश में 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें 11 लेवल-1 एपेक्स हब, 36 लेवल-2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल-3 जिला स्तरीय इकाइयां शामिल होंगी। इसका उद्देश्य मरीज की स्थिति के अनुसार उसे सबसे नजदीकी और सक्षम चिकित्सा केंद्र तक जल्द पहुंचाना है।

हर साल 10 से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित घोष के मुताबिक यूपीटीईएन के जरिए हर साल 10 हजार से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर दुर्घटनाओं में समय पर इलाज मिलने से मृत्यु और स्थायी विकलांगता के मामलों को कम किया जा सकता है। सरकार का फोकस सिर्फ अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि अस्पताल, एंबुलेंस, ट्रॉमा सेंटर, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और कमांड सेंटर को एक ही आपातकालीन नेटवर्क में जोड़ने पर है।

1,200 ALS एंबुलेंस बनेंगी चलते-फिरते इमरजेंसी सेंटर

योजना के तहत प्रदेश की 1,200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट यानी ALS एंबुलेंस को यूपीटीईएन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इन एंबुलेंस को केवल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का माध्यम न मानकर चलते-फिरते आपात उपचार केंद्र के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के 18 मंडलीय स्तर के कमांड सेंटर नेटवर्क के संचालन में अहम भूमिका निभाएंगे। इन केंद्रों के जरिए इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस, अस्पतालों में उपलब्ध बेड और विशेषज्ञ डॉक्टरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।

यूपीटीईएन से 30 से 50 प्रतिशत कम होगा रिस्पांस टाइम

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यूपीटीईएन के जरिए आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 30 से 50 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। अस्पताल पहुंचने से पहले महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निर्णय लेने के लिए करीब 10 मिनट का अतिरिक्त समय हासिल करने की भी योजना है। इसके लिए रियल-टाइम नेटवर्किंग, डिजिटल अलर्ट सिस्टम और एआई आधारित ट्रायेज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल प्रस्तावित है। इसका मकसद तय करना होगा कि किस मरीज को किस अस्पताल और किस विशेषज्ञ विभाग में भेजा जाए। पूरी व्यवस्था ‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम’ के सिद्धांत पर आधारित होगी।

आम नागरिक भी बनेंगे फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क का हिस्सा

यूपीटीईएन योजना में आम लोगों को भी आपातकालीन व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए तीन स्तरों पर फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क विकसित करने की योजना है।

पहले स्तर पर पुलिस, एंबुलेंस चालक, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल जैसे तत्काल सहायता पहुंचाने वाले कर्मी होंगे। दूसरे स्तर पर पुलिस, होमगार्ड और अन्य संस्थागत रिस्पॉन्डर शामिल होंगे। तीसरे स्तर पर आम नागरिकों को बेसिक इमरजेंसी रिस्पांस का प्रशिक्षण देकर जरूरत के समय शुरुआती सहायता देने के लिए तैयार किया जाएगा।

48 घंटे तक मुफ्त इमरजेंसी इलाज की व्यवस्था

यूपीटीईएन योजना के तहत सभी नागरिकों के लिए 48 घंटे तक मुफ्त आपातकालीन उपचार की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य दुर्घटना या गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार पर तत्काल इलाज के खर्च का दबाव कम करना है, ताकि आर्थिक कारणों से इलाज में देरी न हो। इसके साथ ही ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क के लिए अलग बजट, मानव संसाधन नीति और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

इमरजेंसी मेडिसिन कैडर और विशेषज्ञ डॉक्टरों पर फोकस

योजना में इमरजेंसी मेडिसिन ऑफिसर यानी EMO कैडर बनाने, एम्स के अनुरूप वेतनमान और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में इमरजेंसी चिकित्सा व्यवस्था को ज्यादा तेज, तकनीक आधारित और आपस में जुड़ा हुआ बनाना है। अगर यूपीटीईएन योजना अपने निर्धारित लक्ष्यों के मुताबिक लागू होती है, तो सड़क हादसों और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी में ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।