ट्रंप का बयान: पुतिन शांति समझौते के लिए तैयार, जेलेंस्की में नहीं दिख रहा उत्साह

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। ट्रंप का सीधा आरोप है कि शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा रूस नहीं, बल्कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर दिया बयान ओवल ऑफिस में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन डील करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन जेलेंस्की शांति प्रक्रिया में वैसी उत्सुकता नहीं दिखा रहे। जब उनसे पूछा गया कि अब तक यह संघर्ष

Wrriten By :

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Published On :

जनवरी 15, 2026

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वाशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। ट्रंप का सीधा आरोप है कि शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा रूस नहीं, बल्कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की हैं।

ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर दिया बयान

ओवल ऑफिस में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन डील करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन जेलेंस्की शांति प्रक्रिया में वैसी उत्सुकता नहीं दिखा रहे। जब उनसे पूछा गया कि अब तक यह संघर्ष क्यों नहीं सुलझ सका, तो ट्रंप ने इसका जिम्मेदार उन्होंने जेलेंस्की को ठहराया।

ट्रंप के इस रुख से कीव और यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पारंपरिक रूप से माना जाता रहा है कि रूस ही युद्ध खत्म करने का इच्छुक नहीं है।

वर्तमान में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशर के नेतृत्व में शांति वार्ता चल रही है। अमेरिका की ओर से यूक्रेन पर दबाव डाला जा रहा है कि वह युद्ध विराम के बदले पूर्वी डोनबास क्षेत्र पर अपना दावा छोड़ दे। बातचीत का मुख्य फोकस इस बात पर है कि युद्ध के बाद यूक्रेन को ऐसी सुरक्षा गारंटी दी जाए जिससे रूस दोबारा हमला न कर सके।

कई देशों को खटक रहा ट्रंप का बयान

ट्रंप का पुतिन पर बढ़ता भरोसा और जेलेंस्की की आलोचना यूरोपीय देशों को खटक रही है। कई यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि पुतिन वास्तव में किसी समझौते के मूड में नहीं हैं, बल्कि वे केवल वक्त हासिल करना चाहते हैं। ट्रंप के इस रुख ने कीव के सामने बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है, क्योंकि युद्ध के लिए अमेरिकी सहायता बहुत हद तक ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर निर्भर है।

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