Trump’s Warning : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में एक ऐसा बयान जारी किया है, जिसने वैश्विक राजनीति और रक्षा गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक रहस्यमयी लेकिन गंभीर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि “एक बड़ा तूफान आने वाला है और उसे कोई रोक नहीं पाएगा।” उनका यह बयान उस वक्त आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम तो है, लेकिन शांति की कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
ट्रंप का सोशल मीडिया पोस्ट: किसी बड़े हमले का पूर्वाभ्यास?
डोनाल्ड ट्रंप के इस पोस्ट ने पूरी दुनिया के विशेषज्ञों को चौकन्ना कर दिया है। ‘बड़ा तूफान’ शब्द का उपयोग अक्सर सैन्य अभियानों के संदर्भ में किया जाता रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे ईरान के खिलाफ किसी बड़े और निर्णायक सैन्य कदम के संकेत के रूप में देख रहे हैं। कुछ विश्लेषक इसे मशहूर पॉप कल्चर या टीवी सीरीज के उस डायलॉग से भी जोड़ रहे हैं जो एक आसन्न खतरे की चेतावनी देता है। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से अब तक इस पोस्ट की कोई आधिकारिक व्याख्या नहीं की गई है, जिससे कयासों का बाजार और गर्म हो गया है।
ईरान पर चौतरफा दबाव: परमाणु मुद्दे पर अमेरिका की सख्त शर्त
ट्रंप के इस बयान के पीछे की रणनीति ईरान पर अत्यधिक दबाव (Maximum Pressure) बनाए रखने की मानी जा रही है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने बहुत कम समय के नोटिस पर ईरान के रणनीतिक और सामरिक ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया है। यही कारण है कि ट्रंप के एक वाक्य के पोस्ट को ईरान के खिलाफ संभावित हवाई हमले या साइबर युद्ध की चेतावनी माना जा रहा है। अमेरिका का स्पष्ट उद्देश्य ईरान को बातचीत की मेज पर अपनी शर्तों के अनुसार झुकाना है।
शांति प्रस्ताव खारिज: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर छिड़ी रार
हाल ही में ईरान ने एक शांति प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें उसने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी हटाने और युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की पेशकश की थी। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं है और जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए ठोस समझौता नहीं करता, तब तक उस पर लगे प्रतिबंध और सैन्य दबाव कम नहीं किए जाएंगे। अमेरिका चाहता है कि पहले परमाणु खतरों का समाधान हो, तभी अन्य रियायतों पर विचार किया जाएगा।
कैसे शुरू हुई थी जंग: 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक का घटनाक्रम
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा संकट की जड़ें इसी साल 28 फरवरी में छिपी हैं। इस दिन अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइलें दागकर पलटवार किया। यह संघर्ष करीब 39 दिनों तक चला, जिसमें दोनों पक्षों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। आखिरकार 8 अप्रैल को एक अस्थायी सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति बनी। हालांकि इस विराम की अवधि बढ़ाई गई है, लेकिन यह शांति बेहद नाजुक है।
युद्धविराम के बीच अनिश्चितता: क्या फिर शुरू होगी गोलाबारी?
भले ही वर्तमान में सीमाएं शांत दिख रही हों, लेकिन धरातल पर तनाव चरम पर है। ईरान की अर्थव्यवस्था नाकेबंदी के कारण चरमरा रही है और वह जल्द से जल्द युद्ध खत्म करना चाहता है। दूसरी ओर, अमेरिका ‘पहले परमाणु समझौता, फिर शांति’ की अपनी जिद पर अड़ा है। ट्रंप का ताजा ‘तूफान’ वाला बयान इस बात का संकेत दे रहा है कि यदि कूटनीति विफल रही, तो अमेरिका एक बार फिर सैन्य शक्ति का सहारा ले सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह कथित ‘तूफान’ कूटनीतिक होगा या सैन्य।
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