Trump Tariff: ग्रीनलैंड न बेचने पर भड़के ट्रंप, इन 8 देशों पर लगेगा भारी जुर्माना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड खरीदने के प्रस्ताव को ठुकराए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। जवाबी कार्रवाई में ट्रंप ने ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस समेत 8 यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ (Tariff) लगाने का ऐलान किया है। 1 फरवरी से 10% और जून से इसे बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार में खलबली मच गई है।

Trump Tariff

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 19, 2026

Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की जिद ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संकट का रूप ले लिया है। डेनमार्क द्वारा ग्रीनलैंड को बेचने से स्पष्ट इनकार के बाद, ट्रंप ने यूरोप के आठ प्रमुख देशों पर दंडात्मक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस कदम ने न केवल ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है, बल्कि नाटो (NATO) के भीतर भी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप का ‘आर्कटिक सुरक्षा’ तर्क और टैरिफ का कड़ा वार

बताते चले कि, राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन समेत यूरोप के आठ देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क (Extra Tariff) लगाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ, तो 1 जून, 2026 से इस टैरिफ दर को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका दशकों से यूरोप को सब्सिडी दे रहा है और अब ‘पेबैक’ का समय आ गया है। उनका दावा है कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा कमजोर है और यदि अमेरिका ने इसे नहीं संभाला, तो रूस या चीन इस रणनीतिक क्षेत्र पर कब्जा कर सकते हैं।

यूरोपीय देशों की संप्रभुता और मैक्रों-स्टारमर का पलटवार

आपको बता दे कि, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ट्रंप की धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। मैक्रों ने इसे ‘अस्वीकार्य धमकी’ करार देते हुए कहा कि फ्रांस राष्ट्रों की स्वतंत्रता और यूरोपीय संप्रभुता (European Sovereignty) की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, ब्रिटिश पीएम स्टारमर ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां के लोगों और डेनमार्क के फैसले पर निर्भर है। उन्होंने नाटो सहयोगियों पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाने को ‘पूरी तरह गलत’ बताया।

पूर्व सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन की चिंता

ट्रंप के इस कदम की आलोचना उनके अपने पूर्व सहयोगियों ने भी की है। पूर्व एनएसए जॉन बॉल्टन ने ट्रंप की बयानबाजी को ‘बेतुकी और तर्कहीन’ बताते हुए कहा कि इससे आर्कटिक में स्थिरता हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। इसी बीच, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी देशों के बीच इस राजनैतिक फूट का सीधा लाभ चीन और रूस को मिलेगा। उन्होंने तर्क दिया कि टैरिफ युद्ध से अमेरिका और यूरोप दोनों आर्थिक रूप से कमजोर होंगे।

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