Ajit Doval China Mission : डोभाल ने बताया वो मिशन, जब चीन की गिरफ्तारी के बाद करियर पर मंडराया संकट

NSA अजीत डोभाल ने अपने शुरुआती करियर से जुड़ा वो किस्सा सुनाया, जिसने उन्हें एक वक्त अपने भविष्य पर सवाल उठाने को मजबूर कर दिया था। सिक्किम में तैनाती के दौरान खुफिया मिशन पर भेजे लोग चीन की हिरासत में पहुंच गए। इसके बाद जांच बैठी और डोभाल को लगा करियर खत्म हो सकता है।

Ajit Doval China Mission

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 19, 2026

Ajit Doval China Mission : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने शुरुआती पुलिस और खुफिया करियर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अनुभव साझा किया। IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में शनिवार को छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने सिक्किम में अपनी तैनाती के दौरान हुए एक खुफिया मिशन का जिक्र किया। डोभाल ने बताया कि सीमा क्षेत्र में भेजे गए कुछ लोग तय समय पर वापस नहीं लौटे थे, जिससे स्थिति गंभीर हो गई थी।

युवा IPS अधिकारी के रूप में मिली थी सिक्किम में जिम्मेदारी

डोभाल के मुताबिक, उस समय वह युवा IPS अधिकारी थे और खुफिया क्षेत्र में उनका करियर शुरुआती दौर में था। उन्हें सिक्किम में इंटेलिजेंस से जुड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने बताया कि उस दौर में सिक्किम के भारत में विलय की प्रक्रिया चल रही थी। उनकी जिम्मेदारियों में सीमा क्षेत्रों पर नजर रखने के अलावा चीनी सेना यानी PLA की गतिविधियों और आवाजाही से संबंधित सूचनाएं जुटाना भी शामिल था।

सीमा क्षेत्र में भेजा गया था खुफिया मिशन

NSA ने बताया कि एक अवसर पर कुछ लोगों को सीमा क्षेत्र में एक खुफिया मिशन के लिए भेजा गया। योजना के मुताबिक, उन्हें लगभग आठ दिन बाद वापस लौटना था। हालांकि, पांच दिन बीतने के बाद भी उनकी कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद कई और दिन गुजर गए, लेकिन मिशन में शामिल लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। डोभाल ने कहा कि यह परिस्थिति उनके लिए पेशेवर और मानवीय दोनों स्तरों पर चिंता का विषय बन गई थी।

मुख्यालय के फोन से सामने आई चीनी हिरासत की जानकारी

काफी समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने के बाद डोभाल को मुख्यालय से फोन आया। वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा पार भेजा था। इसके बाद उन्हें बताया गया कि मिशन में शामिल लोग चीनी पक्ष के कब्जे में हैं। डोभाल के अनुसार, चीनियों ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। बाद में बातचीत और किसी व्यवस्था के जरिए उन्हें भारत वापस लाया गया।

भारत लौटने पर मिशन में शामिल लोगों की हालत खराब थी

डोभाल ने बताया कि जब मिशन में शामिल लोग वापस भारत पहुंचे, तब उनकी स्थिति काफी खराब थी। इस घटना के बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें अपने करियर को लेकर गंभीर आशंका होने लगी थी। वह सेवा में बिल्कुल शुरुआती चरण में थे और उन्हें लग रहा था कि इस घटना का उनके पेशेवर भविष्य पर असर पड़ सकता है। यहां तक कि उन्हें अपना करियर खत्म होने का डर भी महसूस हुआ।

जांच के बाद डोभाल को नहीं ठहराया गया जिम्मेदार

NSA ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद उन्हें इस घटना के लिए दोषी नहीं माना गया। जांच के दौरान सामने आया कि मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए कुछ स्केच और नक्शों में गलतियां या खामियां थीं। डोभाल ने संकेत दिया कि उन्होंने अपनी ओर से उपलब्ध प्रक्रिया और जानकारी के आधार पर जिम्मेदारी निभाई थी। जांच के निष्कर्ष के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और उनका करियर आगे जारी रहा।

युवाओं को अवसरों का इस्तेमाल करने की दी सलाह

IIT रुड़की के छात्रों से बातचीत के दौरान डोभाल ने वर्तमान पीढ़ी के सामने मौजूद अवसरों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के पास असाधारण संभावनाएं हैं। उनके अनुसार, करीब एक हजार वर्षों के लंबे दौर को देखें तो मौजूदा पीढ़ी के सामने उपलब्ध अवसर विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने युवाओं से इन अवसरों को पहचानकर उनका प्रभावी तरीके से उपयोग करने की बात कही।

तकनीक को बताया भविष्य के विकास की अहम ताकत

डोभाल ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और आने वाले समय में तकनीक की भूमिका और बढ़ेगी। किसी देश और समाज के विकास में तकनीकी क्षमता महत्वपूर्ण आधार बनेगी। उन्होंने छात्रों से बदलती दुनिया के अनुरूप खुद को तैयार करने और नई तकनीकों को समझने की सलाह दी। उनके संबोधन में एक ओर शुरुआती खुफिया करियर का अनुभव रहा, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए भविष्य की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

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