India-US Trade: भारत पर 100% टैरिफ का खतरा टला? ट्रंप के फैसले से मिली राहत

ट्रंप का आदेश 16 अक्टूबर 2026 को व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ। इसमें ग्राहम एक्ट के तहत निर्धारित शुल्क और कई प्रतिबंधों से छूट दी गई है। आदेश के मुताबिक, यह छूट तब तक जारी रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या संबंधित अधिकारी आगे कार्रवाई को उचित नहीं मानते।

India-US Trade

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 17, 2026

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India-US Trade: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े कानून के कुछ प्रावधानों को लागू करने से छूट देने का फैसला किया है। इसके पीछे उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रीय हित का हवाला दिया है। इस कानून में रूस से कारोबार करने वाले भारत और चीन जैसे देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में ट्रंप के इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को फिलहाल कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर भविष्य में टैरिफ लगाने का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है।

भारत पर 100% टैरिफ का खतरा क्यों था?

भारत पर 100% टैरिफ का खतरा क्यों था?

बताते चले कि, भारत लंबे समय से रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बाद अमेरिका ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए कई प्रतिबंध लगाए हैं। इसी कड़ी में रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था से जुड़ा कानून चर्चा में आया। अगर अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाता, तो भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार करना महंगा हो सकता था। इससे कपड़ा, मशीनरी, इंजीनियरिंग उत्पाद और दूसरे निर्यात क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका रहती। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करता कि किन उत्पादों पर कितना शुल्क लगाया जाता और छूट किन प्रावधानों पर लागू होती।

कार्यकारी आदेश के जरिए ट्रंप ने दी छूट

डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी करके संबंधित कानून में मौजूद छूट के प्रावधानों का इस्तेमाल किया है। आदेश में उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में प्रतिबंधों और शुल्कों से जुड़ी कुछ कार्रवाई में राहत देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इसके लिए उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को भी इसकी जानकारी दी है।

इस फैसले से रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की कार्रवाई फिलहाल टल सकती है। हालांकि, छूट का दायरा कितना है और यह किन परिस्थितियों में लागू रहेगी, इसे समझने के लिए आदेश के सटीक प्रावधानों को देखना जरूरी है।

रूस पर दबाव बनाने के लिए क्यों लाया गया कानून?

इस कानून का मकसद यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने की रूस की क्षमता पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के साथ कारोबार करने वाले कुछ देशों के सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान बताया गया है।

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इस व्यवस्था के जरिए अमेरिका उन देशों को आर्थिक रूप से प्रभावित कर सकता है, जो रूस के साथ व्यापार जारी रखते हैं। भारत के मामले में रूस से कच्चे तेल की खरीद इस मुद्दे का अहम हिस्सा रही है। हालांकि, रूस से व्यापार करने का मतलब अपने आप यह नहीं है कि भारत के सभी उत्पादों पर 100 फीसदी टैरिफ लग जाएगा। इसके लिए कानून के दायरे और संबंधित आदेश की शर्तें मायने रखती हैं।

भारतीय निर्यातकों को कितनी राहत मिलेगी?

ट्रंप के फैसले से भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। अगर भारतीय सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की कार्रवाई टलती है, तो अमेरिकी बाजार में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को राहत मिल सकती है।

लेकिन इसे भारत के लिए स्थायी राहत मानना जल्दबाजी होगी। अमेरिका की आगे की नीति, रूस से भारत के ऊर्जा व्यापार और संबंधित कानून के तहत होने वाले फैसलों पर स्थिति निर्भर करेगी। अगर भविष्य में छूट वापस ली जाती है या नई कार्रवाई होती है, तो भारतीय निर्यातकों के सामने दोबारा चुनौती आ सकती है।

भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया?

भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया?

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए कानून के कुछ प्रावधानों से छूट दी है। इससे भारत पर संभावित अतिरिक्त टैरिफ का खतरा कुछ समय के लिए कम हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म मानना सही नहीं होगा। भारत के लिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका छूट को कितने समय तक जारी रखता है और रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को लेकर क्या नीति अपनाता है। इसलिए भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों की नजर अब अमेरिका के अगले फैसलों पर रहेगी।