
Punjab News: आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर फिलहाल संशय और सस्पेंस की स्थिति बनी हुई है। इस बीच, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने एक स्पष्ट बयान में कहा है कि अकाली दल के साथ राजनीतिक समझौते या गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
हालांकि, सांगठनिक मोर्चे पर पार्टी की तैयारियों को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल बीजेपी की मौजूदा तैयारी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की है। पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता और नेता सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार,जुट और तत्पर हैं।
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पंजाब में तीसरे विकल्प की तलाश और जनता का मूड

डॉ. सतीश पूनिया ने वर्तमान राजनीतिक हालातों पर चर्चा करते हुए कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी (आप) तीनों दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब की महान जनता ने इन तीनों ही प्रमुख दलों को राज्य में सरकार बनाने का पूरा मौका दिया है, लेकिन विडंबना यह रही कि ये सभी दल जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरे उतरने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।
यही वजह है कि इस बार पंजाब की जनता बीजेपी को एक मजबूत, भरोसेमंद और स्थिर विकल्प के रूप में देख रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य की मौजूदा सरकार और पुरानी पार्टियों के खिलाफ जबरदस्त ‘एंटी-इन्कंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) काम कर रही है, जिसका सीधा फायदा आगामी चुनावों में बीजेपी को मिलने की पूरी संभावना है।

चुनाव के लिए तीन प्रमुख मुद्दे और केंद्रीय संकल्प

पूनिया के अनुसार, आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने एजेंडे में तीन सबसे बड़े और अहम मुद्दों को तय किया है। ये मुद्दे हैं— नशा, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार। उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब समेत पूरे देश से नशे के काले कारोबार को जड़ से खत्म करने का कड़ा संकल्प लिया है। पंजाब की जागरूक जनता सरकार के इस सुरक्षा और जनहित अभियान पर पूरा भरोसा रखती है।
अतीत के सीट शेयरिंग समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने गठबंधन के तहत 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था। लेकिन इस बार सीटों के बंटवारे या नए समझौते पर किसी भी प्रकार की आधिकारिक चर्चा तभी उचित होगी जब दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस दिशा में कोई ठोस बातचीत आगे बढ़ेगी। फिलहाल पार्टी का पूरा ध्यान सभी 117 सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने पर केंद्रित है।
गांधी परिवार पर तीखा हमला और 1984 के दंगों का जिक्र
प्रेसवार्ता के दौरान सतीश पूनिया ने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार पर भी तीखे राजनीतिक प्रहार किए। प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी को लेकर उपजे विवाद पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार का ‘लॉन्चिंग पैड’ अब पूरी तरह खराब और बेअसर हो चुका है।
इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आगामी 1 नवंबर को विपक्षी दलों द्वारा प्रस्तावित रैली की तारीख पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने याद दिलाया कि यही वह मनहूस तारीख है जब साल 1984 में सिखों का भीषण कत्लेआम हुआ था। ऐसी संवेदनशील तिथि पर राजनीतिक रैलियां आयोजित करना कांग्रेस की गलत मंशा को दर्शाता है, और पार्टी की इस रणनीति पर जनता सवाल उठा रही है।
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