
US Midterm Election Results : अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। चुनावी नतीजों ने अमेरिकी राजनीति की तस्वीर बदल दी है। पहले सीनेट का नियंत्रण गंवाने के बाद रिपब्लिकन पार्टी अब प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी बहुमत खो चुकी है। इस तरह अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण स्थापित होने जा रहा है। यह परिणाम ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स ने हासिल किया बहुमत
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटें हैं और बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। चुनावी आंकड़ों के अनुसार डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं रिपब्लिकन पार्टी इस मुकाबले में काफी पीछे रह गई। डेमोक्रेट्स ने ट्रंप की गिरती लोकप्रियता और सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष को चुनाव में अपने पक्ष में भुनाया।
रिपब्लिकन के मजबूत राज्यों में भी डेमोक्रेट्स की सेंध
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन के पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले कई राज्यों में भी जीत दर्ज की। साउथ कैरोलिना, नॉर्थ कैरोलिना, टेक्सास, ओहायो और कान्सास जैसे राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन किया। इनमें कई ऐसे राज्य शामिल हैं, जहां लंबे समय से डेमोक्रेट्स को राज्यव्यापी चुनावों में जीत नहीं मिली थी।
सीनेट में भी पलटा चुनावी खेल, चार सीटों से बदली तस्वीर
प्रतिनिधि सभा से पहले डेमोक्रेट्स सीनेट का नियंत्रण भी हासिल कर चुके थे। पार्टी को रिपब्लिकन से बहुमत छीनने के लिए चार अतिरिक्त सीटों की जरूरत थी। चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने यह लक्ष्य पूरा कर लिया। साउथ कैरोलिना में एनी एंड्रयूज ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराया, जबकि नॉर्थ कैरोलिना में पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने जीत दर्ज की।टेक्सास में जेम्स टालारिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराकर बड़ा उलटफेर किया। वहीं ओहायो में शेरवुड ब्राउन और कान्सास में एडम हैमिल्टन ने भी जीत हासिल की। इन नतीजों ने सीनेट में सत्ता का समीकरण बदल दिया।
ट्रंप की ट्राइफेक्टा सत्ता खत्म, अब विपक्ष की बढ़ेगी ताकत
साल 2024 के चुनाव के बाद रिपब्लिकन पार्टी के पास राष्ट्रपति पद, सीनेट और प्रतिनिधि सभा तीनों का नियंत्रण था। अमेरिकी राजनीति में इसे ट्राइफेक्टा कहा जाता है। लेकिन मध्यावधि चुनाव ने यह स्थिति बदल दी है। राष्ट्रपति पद ट्रंप के पास रहेगा, मगर कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की पकड़ मजबूत हो जाएगी।
महंगाई और ट्रंप की नीतियां बनीं हार की वजह
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक रिपब्लिकन पार्टी की हार के पीछे महंगाई, ट्रंप की टैरिफ नीति, ईरान युद्ध और उनकी कार्यशैली जैसे मुद्दे अहम रहे। मतदाता सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में लोगों ने ट्रंप के कामकाज पर असंतोष जताया। कई मतदाताओं का मानना था कि उनकी नीतियों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति और खराब हुई है।
ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच और निगरानी बढ़ाएंगे डेमोक्रेट्स
कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण मिलने से डेमोक्रेट्स को ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच शुरू करने और सरकारी अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाने की अधिक ताकत मिलेगी। इसके अलावा सीनेट में बहुमत के कारण राष्ट्रपति के न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी फैसलों को भी चुनौती दी जा सकती है।
राष्ट्रपति की वीटो शक्ति बनेगी डेमोक्रेट्स के लिए चुनौती
हालांकि दोनों सदनों में बहुमत मिलने के बावजूद डेमोक्रेट्स के लिए अपने सभी कानून लागू करना आसान नहीं होगा। राष्ट्रपति ट्रंप के पास वीटो का अधिकार है। इसके अलावा सीनेट में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए 60 वोटों की जरूरत होती है।इस तरह अमेरिकी मध्यावधि चुनाव ने वाशिंगटन में सत्ता का संतुलन बदल दिया है। आने वाले दो वर्षों में ट्रंप प्रशासन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है।











