Uttarakhand News: रेखा आर्या के पति गिरधारी साहू को हाईकोर्ट से झटका, एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज

Uttarakhand News: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सामान्य वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें कई गंभीर आपराधिक आरोप शामिल हैं। ऐसे में इस स्तर पर एफआईआर निरस्त करने का कोई उचित आधार नहीं बनता। Uttarakhand News: विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज, 16 नवंबर से

रेखा आर्या के पति गिरधारी साहू को हाईकोर्ट से झटका

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

नवम्बर 4, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

Uttarakhand News: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सामान्य वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें कई गंभीर आपराधिक आरोप शामिल हैं। ऐसे में इस स्तर पर एफआईआर निरस्त करने का कोई उचित आधार नहीं बनता।

देहरादून के कैंट थाने में दर्ज कराया गया था मुकदमा

मामला देहरादून के कैंट थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की ओर से अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120-बी, 323, 420, 467, 468, 471, 495, 498-ए, 504 और 506 के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1) के तहत आरोप लगाए गए थे। शिकायत में धोखाधड़ी, मारपीट, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं।

पति की ओर से दी गई घरेलू विवाद की दलील

पति की ओर से दी गई घरेलू विवाद की दलील
पति की ओर से दी गई घरेलू विवाद की दलील

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता गिरधारी साहू के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि दोनों का विवाह जुलाई 2004 में हुआ था और वे लगभग 22 वर्षों से साथ रह रहे हैं। बचाव पक्ष का कहना था कि यह मूल रूप से घरेलू विवाद है, जिसे अब आपराधिक मामला बनाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, रेखा आर्या की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शादी के समय साहू ने अपनी पहली शादी और बच्चों से संबंधित जानकारी छिपाई थी।

मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि गिरधारी साहू के अन्य महिलाओं से कथित संबंध थे। इसका विरोध करने पर उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इसके अलावा, आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेज तैयार कर रेखा आर्या को कंपनी के निदेशक पद से जबरन सेवानिवृत्त दिखा दिया गया, जबकि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया था। इन आरोपों को भी अदालत के समक्ष रखा गया।

ऑडियो रिकॉर्डिंग में हत्या की साजिश का आरोप

मामले में एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी उल्लेख किया गया। शिकायत पक्ष के अनुसार, इस रिकॉर्डिंग में साहू द्वारा रेखा आर्या को रास्ते से हटाने और इसके लिए पैसे खर्च करने से संबंधित बातचीत सामने आई है। राज्य सरकार के सरकारी अधिवक्ता और रेखा आर्या के वकील ने इन आरोपों की गंभीरता का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रहा है।

अदालत ने कहा- पुराने रिश्ते से गंभीर आरोप खारिज नहीं होते

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि करीब 22 वर्षों का वैवाहिक संबंध होने मात्र से बाद में सामने आए कथित अपराधों और क्रूरता की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि शारीरिक प्रताड़ना, दस्तावेजों की कूट रचना, जातिसूचक अपमान और हत्या की साजिश जैसे आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर संज्ञेय अपराधों की श्रेणी में आते हैं। कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच होना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला, याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के भजनलाल और निहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर मामलों में निर्धारित कानूनी सिद्धांतों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता। आरोपों की सच्चाई का निर्धारण जांच और मुकदमे के दौरान होगा। इसी आधार पर अदालत ने गिरधारी साहू की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर बरकरार रहेगी और मामले की जांच आगे जारी रह सकेगी।

Uttarakhand News: उत्तराखंड हाईकोर्ट को मिलने वाला है नया ठिकाना, वन भूमि पर केंद्र के फैसले का

2