
Uttarakhand News: उत्तराखंड में नैनीताल स्थित हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दिशा में केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है। मंगलवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में उत्तराखंड हाईकोर्ट के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए आरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण और वन भूमि डायवर्जन से संबंधित प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से संबंधित प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने का अनुरोध किया।
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लामाचौड़ में बनेगा हाईकोर्ट का स्थायी परिसर
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य सरकार हल्द्वानी के लामाचौड़ क्षेत्र में हाईकोर्ट का स्थायी परिसर विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए प्रस्तावित भूमि से जुड़ी वन संबंधी औपचारिकताएं पूरी होना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने वन भूमि हस्तांतरण और डायवर्जन की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग रखी, ताकि नए परिसर के निर्माण का रास्ता साफ हो सके। राज्य सरकार इस परियोजना को भविष्य की न्यायिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है।
नैनीताल हाईकोर्ट परिसर में भूस्खलन का खतरा बड़ी चुनौती

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्तमान हाईकोर्ट परिसर की भौगोलिक परिस्थितियों और वहां आने वाली समस्याओं से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि नैनीताल में चाइना पीक की तलहटी में स्थित हाईकोर्ट परिसर के आसपास भूस्खलन की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा लगातार बढ़ते यातायात दबाव और पर्यटकों की आवाजाही के कारण भी व्यवस्थाओं पर असर पड़ता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय के लिए बेहतर और सुरक्षित आधारभूत ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पर्यटन सीजन में वादकारियों और अधिवक्ताओं को होती है परेशानी
सीएम धामी ने कहा कि पर्यटन सीजन के दौरान नैनीताल में वाहनों की संख्या काफी बढ़ जाती है। इसका सीधा असर हाईकोर्ट आने वाले वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों के आवागमन पर पड़ता है। भीड़ बढ़ने के साथ पार्किंग की समस्या भी गंभीर हो जाती है। ऐसे में न्यायिक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए स्थायी और आधुनिक परिसर विकसित करना जरूरी है। सरकार का मानना है कि नई जगह पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से न्यायिक गतिविधियों के विस्तार में भी मदद मिलेगी।
हल्द्वानी का लामाचौड़ क्षेत्र क्यों है बेहतर विकल्प?
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि हल्द्वानी का लामाचौड़ क्षेत्र सड़क और राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है। यहां हाईकोर्ट का स्थायी परिसर बनने से न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और वादकारियों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। इसके साथ ही न्यायिक कार्यों के लिए जरूरी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने का अवसर भी मिलेगा। राज्य सरकार इसे भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में आगे बढ़ा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला, केंद्र ने दिया आश्वासन
बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नए भवन के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने के साथ निर्धारित समयसीमा में उसका कब्जा और हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाना है। राज्य सरकार इस दिशा में संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर प्रक्रियाओं को प्राथमिकता से आगे बढ़ा रही है। वहीं, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। अब वन भूमि से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद हाईकोर्ट के स्थायी परिसर के निर्माण की दिशा में अगला कदम उठने की उम्मीद है।
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