Trump NATO Warning: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सख्त तेवरों से वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के भविष्य को लेकर एक बड़ी और गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि नाटो के सदस्य देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने में अमेरिका की मदद नहीं करते हैं, तो इस सैन्य गठबंधन का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों को सीधा संदेश देते हुए कहा कि समुद्री मार्ग की सुरक्षा का बोझ अब केवल अमेरिका के कंधों पर नहीं रहेगा।
लाभ और जिम्मेदारी का सिद्धांत: जो फायदा उठा रहे हैं, वे मदद के लिए आगे आएं
राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि जो देश इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से होने वाले व्यापार और तेल आपूर्ति से लाभ प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने अखबार से बातचीत में कहा, “यह बिल्कुल उचित और न्यायसंगत है कि जो लोग इस स्ट्रेट से फायदा उठाते हैं, वे यह सुनिश्चित करने में हाथ बँटाएं कि वहां कोई अप्रिय घटना न हो।” उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में जोड़ा कि यदि सहयोगियों की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो यह नाटो के अस्तित्व के लिए एक बहुत बुरा संकेत होगा। ट्रंप ने इसे ‘पारस्परिक सहायता’ के सिद्धांत से जोड़ा है।
यूक्रेन का उदाहरण और ‘गिव एंड टेक’ की नीति: ट्रंप ने सहयोगियों को घेरा
ट्रंप ने नाटो देशों की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए यूक्रेन युद्ध का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि रूस के खिलाफ संघर्ष में अमेरिका ने यूक्रेन की जो भारी मदद की, उसकी कोई अनिवार्य जरूरत नहीं थी, फिर भी अमेरिका साथ खड़ा रहा। अब समय आ गया है कि यूरोपीय देश अमेरिका की जरूरतों के समय साथ खड़े हों। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा, “मैं लंबे समय से कहता आ रहा हूं कि हम उनके लिए हमेशा मौजूद रहेंगे, लेकिन जब हमारी बारी आती है, तो वे पीछे हट जाते हैं। अब हम देखेंगे कि वे हमारे लिए क्या करते हैं।” उनका इशारा साफ है कि अब अमेरिकी सहायता एकतरफा नहीं होगी।
सैन्य अपेक्षाएं: माइनस्वीपर्स और ईरानी ड्रोन के खिलाफ साझा मोर्चा
जब ट्रंप से पूछा गया कि वे नाटो देशों से किस तरह की मदद की अपेक्षा कर रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे क्षेत्र में ठोस सैन्य तैनाती चाहते हैं। इसमें विशेष रूप से ‘माइनस्वीपर’ (समुद्र से बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज) तैनात करना शामिल है। ट्रंप का मानना है कि सहयोगी देश ईरानी तट से उत्पन्न होने वाले खतरों, जैसे कि समुद्री बारूदी सुरंगों और आत्मघाती ड्रोनों को बेअसर करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने एयरफोर्स वन में संवाददाताओं से कहा कि यह एक छोटा सा प्रयास है जो केवल वैश्विक व्यापार के लिए इस जलमार्ग को खुला रखने के लिए आवश्यक है।
ब्रिटेन से नाराजगी: पीएम कीर स्टार्मर के रुख पर ट्रंप का तीखा प्रहार
इस पूरे घटनाक्रम में ट्रंप ने अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगी ब्रिटेन के प्रति भी अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि जब उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए ब्रिटेन का समर्थन मांगा, तो वहां से तत्काल सहयोग नहीं मिला। ट्रंप ने कहा, “ब्रिटेन को हमारा नंबर-1 सहयोगी माना जाता है, लेकिन जब मैंने उनसे आने के लिए कहा, तो वे आना नहीं चाहते थे।” ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि आने वाले समय में अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच रिश्तों की नई शर्तें तय होंगी, जो पूरी तरह से ‘साझा सैन्य योगदान’ पर आधारित होंगी।
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