Trump Gaza Riviera: ट्रंप का गाजा को ‘रिवेरा’ बनाने का प्रस्ताव, फिलिस्तीन ने रखी अपनी शर्तें

गाजा का कायाकल्प या 'साम्राज्यवादी' एजेंडा? राष्ट्रपति ट्रंप ने दावोस में गाजा को दुनिया का सबसे शानदार 'वाटरफ्रंट रिवेरा' बनाने का खाका पेश किया है। 180 स्काईस्क्रेपर्स और अरबों डॉलर के निवेश वाले इस मास्टर प्लान के बीच फिलिस्तीन ने कौन सी शर्तें रखी हैं और क्या यह शांति का रास्ता है या नई जंग की आहट?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 30, 2026

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Trump Gaza Riviera: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा पट्टी के भविष्य को लेकर दिए गए एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने युद्धग्रस्त गाजा को भूमध्यसागरीय “रिवेरा” (एक आलीशान पर्यटन और व्यापारिक केंद्र) में बदलने का महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव पर फिलिस्तीन ने सकारात्मक लेकिन सतर्क प्रतिक्रिया दी है। फिलिस्तीनी नेतृत्व का मानना है कि पुनर्निर्माण की कोई भी योजना तभी सफल होगी जब वह वहां के मूल निवासियों के अधिकारों और उनकी राजनीतिक स्वतंत्रता से जुड़ी हो।

फिलिस्तीन की शर्त: ‘रिवेरा’ केवल फिलिस्तीनियों के लिए हो

भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने आईं फिलिस्तीनी विदेश राज्य मंत्री वर्सेन अघाबेकियन शाहीन ने ट्रंप के विचार पर स्पष्ट रुख साझा किया। उन्होंने कहा कि वे गाजा को रिवेरा में बदलने के विचार से इनकार नहीं करतीं, लेकिन यह विकास गाजावासियों के लाभ के लिए होना चाहिए। शाहीन ने जोर देकर कहा, “यदि यह हमारे लोगों के आनंद के लिए है, तो हम इसका स्वागत करते हैं। लेकिन यदि यह फिलिस्तीनियों को बेदखल करके दूसरों के मनोरंजन के लिए बनाया जाता है, तो यह स्वीकार्य नहीं होगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण की लागत फिलिस्तीनियों पर थोपी नहीं जानी चाहिए।

ट्रंप का प्रस्तावित ‘पीस बोर्ड’ और भारत की संभावित भूमिका

शांति प्रक्रिया को गति देने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के नेतृत्व में एक ‘पीस बोर्ड’ (Peace Board) के गठन का प्रस्ताव दिया है। शाहीन ने कहा कि इस बोर्ड में भारत की भागीदारी अत्यंत मददगार साबित हो सकती है। फिलिस्तीन का मानना है कि भारत का इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ संतुलित और रचनात्मक संबंध है, जो उसे एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने की अनुमति देता है। हालांकि, भारत ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है, लेकिन शाहीन ने नई दिल्ली के “दो-राज्य समाधान” (Two-State Solution) के निरंतर समर्थन की सराहना की।

स्वतंत्रता का मार्ग और शांति प्रयासों का स्वागत

दशकों की हिंसा और संघर्ष के बाद, फिलिस्तीन शांति की किसी भी पहल को उम्मीद की किरण के रूप में देखता है। शाहीन ने कहा, “हम हर उस प्रयास का स्वागत करते हैं जो शांति की ओर ले जाता है, लेकिन यह योजना केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसे फिलिस्तीनी स्वतंत्रता और एक संप्रभु राष्ट्र की ओर ले जाने वाले स्पष्ट राजनीतिक मार्ग से जोड़ा जाना चाहिए।” उनके अनुसार, आर्थिक समृद्धि और राजनीतिक अधिकार एक-दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते।

गाजा में नाजुक युद्धविराम और मानवीय स्थिति

जमीनी हकीकत पर चर्चा करते हुए शाहीन ने बताया कि गाजा में वर्तमान स्थिति अभी भी अस्थिर है। हालांकि एक आंशिक युद्धविराम प्रभावी है, लेकिन यह बहुत नाजुक है। उन्होंने कहा कि केवल एक स्थायी और टिकाऊ युद्धविराम ही गाजा के लोगों को राहत दे सकता है और बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण कार्यों की अनुमति दे सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए निरंतर और निस्वार्थ समर्थन की आवश्यकता है।

हमास का निशस्त्रीकरण और भविष्य की रूपरेखा

हमास की भूमिका पर बात करते हुए शाहीन ने एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शांति ढांचे के हिस्से के रूप में हमास को हथियार डाल देने चाहिए। फिलिस्तीनी विदेश राज्य मंत्री ने उम्मीद जताई कि भविष्य की व्यवस्था ऐसी होगी जहाँ हिंसा का कोई स्थान न हो। अंत में, उन्होंने दोहराया कि भारत जैसे मित्र राष्ट्रों का सहयोग शांति प्रक्रिया के परिणामों को परिभाषित करने और क्षेत्र में स्थिरता लाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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