
Trump Election Defeat : अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों के दौरान होने वाले महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन को न्यायपालिका से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कैलिफोर्निया के करीब 20 हजार मेल-इन बैलेट पेपर्स को अलग रखने की सरकार की आपातकालीन याचिका खारिज कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने अदालत में दावा किया था कि कैलिफोर्निया की मतदाता सूची में शामिल इन लोगों में कुछ गैर-अमेरिकी नागरिक भी हो सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। खास बात यह रही कि किसी भी न्यायाधीश ने फैसले पर सार्वजनिक रूप से असहमति नहीं जताई।
मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप की कोशिश नाकाम
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की ट्रंप प्रशासन की कोशिशों के लिए बड़ी नाकामी माना जा रहा है। इससे पहले कई निचली अदालतें और अपील कोर्ट भी न्याय विभाग की याचिका खारिज कर चुके थे। सरकार चाहती थी कि मतदाताओं की नागरिकता का सत्यापन होने तक संबंधित मतपत्रों को अलग रखा जाए। इसके अलावा अलास्का में भी एक न्यायाधीश ने डेमोक्रेटिक सीनेट की जीत को रोकने के उद्देश्य से दायर ट्रंप प्रशासन के मुकदमे को सुनवाई के बिना खारिज कर दिया। इससे पहले सितंबर में भी सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मेल-इन बैलेट पर प्रतिबंध लगाने की ट्रंप की कोशिश को नाकाम कर दिया था।
कैलिफोर्निया की मतदाता सूची में गड़बड़ी का दावा, 42 प्रतिशत नाम संदिग्ध
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलिफोर्निया के चुनाव अधिकारियों ने न्याय विभाग की ओर से तैयार संदिग्ध गैर-नागरिक मतदाताओं की सूची पर सवाल उठाए हैं। UCLA वोटिंग राइट्स प्रोजेक्ट और नागरिक अधिकार संगठन CHIRLA के विश्लेषण में सामने आया कि सूची में शामिल 42 प्रतिशत से अधिक नाम राज्य की मौजूदा मतदाता सूची से मेल नहीं खाते। इसके अलावा कई ऐसे लोगों के नाम भी सूची में शामिल थे, जो प्राकृतिक रूप से अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं और कानूनी रूप से मतदान के पात्र हैं। जिला अदालत की जज ट्रिना थॉम्पसन के सवाल पर न्याय विभाग के वकील केनेथ काओ ने भी स्वीकार किया कि सूची में गलतियों की दर अधिक हो सकती है।
डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल ने ट्रंप प्रशासन पर साधा निशाना
कैलिफोर्निया के डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल रोब बोंटा ने ट्रंप प्रशासन की अपील की आलोचना की। उन्होंने इसे हताशा भरा कदम बताते हुए कहा कि यह अमेरिकी चुनाव व्यवस्था को कमजोर करने और कानून के शासन को प्रभावित करने का एक और प्रयास है। कैलिफोर्निया प्रशासन का कहना है कि बिना पर्याप्त प्रमाण के हजारों मतदाताओं के मतदान अधिकारों पर सवाल खड़े करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
अमेरिकी जजों की सख्त टिप्पणी, लोकतंत्र को खतरे की चेतावनी
इस मामले में अमेरिकी अदालतों ने चुनाव प्रक्रिया में कार्यपालिका के हस्तक्षेप को लेकर गंभीर सवाल उठाए। वाशिंगटन के मुख्य जिला जज जेम्स बोसबर्ग ने अपने फैसले में कहा कि कार्यपालिका संभवतः संविधान के चुनाव संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन कर रही है। संविधान के अनुसार चुनाव नियमों को निर्धारित करने का अधिकार राज्यों और अमेरिकी कांग्रेस के पास है। वहीं, जिला जज डेविड ओ. कार्टर ने चेतावनी दी कि यदि अप्रमाणित आरोपों के आधार पर सरकार वोटों की अनदेखी करने लगे और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करे, तो लोकतंत्र गंभीर खतरे में पड़ सकता है।
कैलिफोर्निया में 2.3 करोड़ मतदाता, बैलेट अलग करना मुश्किल
कैलिफोर्निया में लगभग 2.3 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं और उन्हें डाक के माध्यम से मतदान करने की सुविधा दी जाती है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, लाखों मेल-इन बैलेट पहले ही प्रोसेस किए जा चुके थे। ऐसे में अंतिम समय पर करीब 20 हजार मतपत्रों को अलग करना व्यावहारिक रूप से बेहद मुश्किल था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन मतपत्रों को अलग रखने की ट्रंप प्रशासन की कोशिश सफल नहीं हो सकी। अब इस घटनाक्रम ने अमेरिका में चुनावी अधिकारों, मतदाता सत्यापन और संघीय सरकार की शक्तियों को लेकर बहस तेज कर दी है।











