UP Election 2027: निजामाबाद में सपा की चुनौती, आजमी के निधन के बाद भाजपा और बसपा की नजरें

उत्तर प्रदेश की निजामाबाद विधानसभा सीट पर 2027 का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। पांच बार विधायक रहे आलमबदी आजमी के निधन के बाद सपा के सामने नई चुनौती है। भाजपा और बसपा भी मजबूत दावेदारी की तैयारी में हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या सपा अपना पुराना किला बचा पाएगी?

UP Election 2027

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 3, 2026

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UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर होने वाला चुनाव केवल राज्य की सत्ता तय नहीं करेगा, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीति की दिशा का भी संकेत देगा। इसी बीच आजमगढ़ जिले की निजामाबाद विधानसभा सीट राजनीतिक रूप से चर्चा में आ गई है। यहां समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। खास बात यह है कि सपा के पांच बार विधायक रहे आलमबदी आजमी के निधन के बाद इस सीट पर राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।

आलमबदी आजमी
आलमबदी आजमी

सपा के सामने नेतृत्व की चुनौती

निजामाबाद विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आलमबदी आजमी का 22 जुलाई 2026 की देर रात निधन हो गया था। वह इस सीट से पांच बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने 1996 और 2002 में जीत हासिल की थी। हालांकि 2007 में बसपा के अंगद यादव ने उन्हें हरा दिया था। इसके बाद आलमबदी आजमी ने 2012, 2017 और 2022 में लगातार तीन चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।अब 2027 के चुनाव में सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके राजनीतिक प्रभाव और पुराने जनाधार को बरकरार रखने की होगी। पार्टी किस नए चेहरे को मैदान में उतारती है और मतदाताओं के बीच उसकी कितनी स्वीकार्यता बनती है, यह चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकता है।

निजामाबाद विधानसभा सीट
निजामाबाद विधानसभा सीट

निजामाबाद विधानसभा सीट का पूरा चुनावी गणित

आजमगढ़ जिले की निजामाबाद विधानसभा सीट संख्या 348 है। यह लालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और सामान्य श्रेणी की सीट है। उपलब्ध 2026 के आंकड़ों के अनुसार यहां लगभग 3,06,938 मतदाता हैं। वहीं 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 3,27,480 थी।दोनों आंकड़ों के बीच लगभग 20,542 मतदाताओं का अंतर दिखाई देता है। हालांकि 2026 की उपलब्ध संख्या का अंतिम आधिकारिक सत्यापन जरूरी है। एसआईआर के बाद मतदाता सूची में हुए बदलाव को देखते हुए 2027 से पहले सभी राजनीतिक दल बूथ स्तर पर मतदाता सूची का विश्लेषण कर सकते हैं।

यादव, मुस्लिम और दलित मतदाता तय करेंगे चुनावी दिशा

निजामाबाद विधानसभा के चुनावी समीकरण में यादव, मुस्लिम और दलित मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इसके अलावा कुर्मी, पासी, राजभर, ब्राह्मण, क्षत्रिय, मौर्य और अन्य पिछड़े समुदाय भी चुनावी परिणाम प्रभावित कर सकते हैं।समाजवादी पार्टी का परंपरागत आधार यादव और मुस्लिम मतदाताओं के बीच मजबूत माना जाता रहा है। वहीं बसपा दलित मतदाताओं के साथ दूसरे सामाजिक वर्गों को जोड़ने की कोशिश कर सकती है। भाजपा के लिए गैर-यादव पिछड़े वर्गों, सवर्ण और अन्य समुदायों का समर्थन महत्वपूर्ण रहेगा।हालांकि विधानसभा स्तर पर जाति और धर्म के आधार पर प्रमाणित मतदाता संख्या उपलब्ध नहीं होती। इसलिए जातिगत हिस्सेदारी के पुराने अनुमानों को आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

आलमबदी आजमी
आलमबदी आजमी

2022 में सपा ने भाजपा को 34,187 वोटों से हराया

2022 के विधानसभा चुनाव में आलमबदी आजमी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर 79,835 वोट हासिल किए थे। भाजपा के मनोज यादव को 45,648 वोट मिले, जबकि बसपा के पीयूष कुमार सिंह 44,657 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

प्रत्याशीपार्टीप्राप्त वोट
आलमबदी आजमीसपा79,835
मनोज यादवभाजपा45,648
पीयूष कुमार सिंहबसपा44,657
अब्दुर्रहमान अंसारीएआईएमआईएम6,100

सपा ने यह चुनाव 34,187 वोटों के अंतर से जीता था। खास बात यह रही कि भाजपा और बसपा के बीच केवल 991 वोटों का अंतर था। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों दलों के बीच दूसरे स्थान के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा रही थी।

आलमबदी आजमी
आलमबदी आजमी

2017 और 2012 में भी सपा का रहा दबदबा

2017 के विधानसभा चुनाव में आलमबदी आजमी ने 67,274 वोट हासिल करके जीत दर्ज की थी। बसपा के चंद्रदेव राम को 48,745 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा के विनोद कुमार राय 43,786 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थे। इस चुनाव में सपा ने 18,529 वोटों से जीत हासिल की थी।वहीं 2012 में आलमबदी आजमी को 63,894 वोट मिले थे। बसपा के कलामुद्दीन खान 40,051 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा की रंजना देवी को 22,045 वोट मिले थे। इस चुनाव में सपा की जीत का अंतर 23,843 वोट रहा था।

भाजपा और बसपा
भाजपा और बसपा

भाजपा और बसपा के लिए 2027 में बड़ा मौका

आलमबदी आजमी के निधन के बाद निजामाबाद की राजनीति में पैदा हुई खाली जगह भाजपा और बसपा के लिए अवसर बन सकती है। भाजपा 2022 में मिले 45,648 वोटों के आधार पर अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश करेगी। वहीं बसपा के पास 44,657 वोटों का पुराना आधार है।अगर बसपा अपने परंपरागत मतदाताओं को एकजुट रखने के साथ दूसरे समुदायों में समर्थन बढ़ाती है, तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। दूसरी तरफ भाजपा के लिए स्थानीय उम्मीदवार की स्वीकार्यता और सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण होंगे।

ब्लैक पॉटरी और रोजगार के मुद्दे भी बनेंगे चुनावी मुद्दे

निजामाबाद की पहचान पारंपरिक ब्लैक पॉटरी यानी काली मिट्टी से बने बर्तनों और सजावटी उत्पादों के लिए भी है। स्थानीय कारीगरों के सामने बाजार, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और उत्पादों की बिक्री जैसी चुनौतियां महत्वपूर्ण हैं।इसके अलावा ग्रामीण सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, कृषि, सिंचाई और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे भी चुनावी चर्चा में रह सकते हैं। राजनीतिक दलों के लिए केवल जातिगत समीकरणों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय विकास के मुद्दों पर भी मतदाताओं का भरोसा जीतना जरूरी होगा।

2027 में निजामाबाद में किसका पलड़ा रहेगा भारी?

निजामाबाद का चुनावी इतिहास बताता है कि समाजवादी पार्टी ने पिछले तीन विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज की है। लेकिन आलमबदी आजमी के निधन के बाद पार्टी के सामने नए नेतृत्व को स्थापित करने की चुनौती है। भाजपा और बसपा इस राजनीतिक बदलाव का फायदा उठाने की कोशिश कर सकती हैं।2027 में सपा का उम्मीदवार, भाजपा की रणनीति, बसपा का सामाजिक आधार और विभिन्न समुदायों का रुझान चुनावी तस्वीर तय करेगा। ऐसे में निजामाबाद की लड़ाई केवल पुराने चुनावी आंकड़ों की नहीं, बल्कि नए नेतृत्व और बदलते राजनीतिक समीकरणों की भी होगी।

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