TMC MP Bapi Haldar : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से शुरू हुआ सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ-साथ सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों ने सूबे की राजनीति को पहले ही गरमा दिया था। यह विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब टीएमसी के एक और सांसद बापी हलदर स्थानीय लोगों के गुस्से का शिकार हो गए। आक्रोशित भीड़ ने उनके कार्यालय को निशाना बनाया, जिससे पूरे इलाके में स्थिति बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण हो गई है।
सांसद बापी हलदर के दफ्तर पर हमला और हंगामा
यह हिंसक घटना पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आने वाले मथुरापुर के कृष्णचंद्रपुर क्षेत्र में रविवार शाम को घटित हुई। जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवासियों और स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं के एक बड़े समूह ने मथुरापुर के लोकसभा सांसद बापी हलदर के क्षेत्रीय कार्यालय पर अचानक धावा बोल दिया। देखते ही देखते प्रदर्शनकारियों की भीड़ उग्र हो गई। गुस्से में तमतमाए लोगों ने सांसद के दफ्तर की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर कर दिए और बाहर लगे साइन बोर्ड को भी तोड़ डाला। दफ्तर के भीतर और बाहर जमकर हंगामा काटा गया।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के गंभीर आरोप
कार्यालय का घेराव और तोड़फोड़ करने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सांसद बापी हलदर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थानीय लोगों ने सांसद पर लंबे समय से क्षेत्र में व्यापक भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्त रहने के बेहद गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इलाके में तानाशाही का माहौल बना दिया गया है। जो भी व्यक्ति इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है। इतना ही नहीं, राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए उनके खिलाफ पुलिस में झूठे मुकदमे और फर्जी मामले दर्ज कराए जा रहे हैं।
स्वयं सहायता समूहों (SHG) के फंड में धांधली का दावा
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का मुख्य गुस्सा स्वयं सहायता समूहों के लिए आने वाली सरकारी सहायता को लेकर था। महिला प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा कि क्षेत्र की कई पात्र और जरूरतमंद महिलाएं सरकारी योजनाओं और वित्तीय लाभों से पूरी तरह वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वयं सहायता समूह के लाभार्थियों के लिए जो फंड और वित्तीय सहायता आवंटित की गई थी, उसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। पात्र महिलाओं को उनका हक देने के बजाय उस धनराशि की हेरफेर कर दी गई, जिसके कारण योग्य सदस्यों तक कभी कोई मदद नहीं पहुंच सकी।
राहत सामग्री की जमाखोरी पर भड़का जनता का गुस्सा
मथुरापुर में हुए इस भारी बवाल की मुख्य वजह सरकारी राहत सामग्री की जमाखोरी को माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बाढ़ पीड़ितों और अन्य जरूरतमंदों के लिए आई राहत सामग्री को जनता में बांटने के बजाय सांसद के दफ्तर में छिपाकर रखा गया था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब जनता दाने-दाने को मोहताज हो रही है, तब राहत सामग्री को अवैध रूप से पार्टी कार्यालय के भीतर डंप करके रखा गया है। इसी अनियमितता और जमाखोरी की खबर फैलते ही लोगों का धैर्य जवाब दे गया और वे दफ्तर परिसर में घुस गए।
पुलिस की कार्रवाई और इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया और भारी बल के साथ मौके पर पहुंचा। दक्षिण 24 परगना जिले की पुलिस ने बताया कि मथुरापुर में टीएमसी सांसद के कार्यालय में तोड़फोड़ की यह घटना बाढ़ राहत सामग्री को अवैध रूप से रखने के आरोपों के बाद हुई। पुलिस अधिकारियों ने सूझबूझ से काम लेते हुए उग्र भीड़ को समझा-बुझाकर और हल्का बल प्रयोग कर कार्यालय परिसर से बाहर खदेड़ा। पुलिस की मुस्तैदी से स्थिति को नियंत्रण में लिया गया, लेकिन घटना के बाद से पूरे इलाके में माहौल काफी तनावपूर्ण है। प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
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