तिब्बत में 240 अहम पदों में सिर्फ 62 पर तिब्बती, चीन पर राजनीतिक नियंत्रण बढ़ाने का आरोप

वाशिंगटन  तिब्बत पर अपने नियंत्रण को मजबूत करने के लिए ड्रैगन अब नई चालें चल रहा है। प्रशासन में अहम पदों पर तिब्बतियों की भागीदारी को लगातार सीमित कर रहा है। वाशिंगटन स्थित अधिकार संगठन इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (ICT) की एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन तिब्बत पर अपना राजनीतिक नियंत्रण लगातार मजबूत कर रहा है और महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों पर तिब्बतियों की भागीदारी सीमित होती जा रही है। महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले पदों से तिब्बतियों को दूर रखा जा रहा है। मानवीय सहायता और वित्त पोषण बहाल करने की मांग ICT

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Published On :

अगस्त 23, 2026

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वाशिंगटन
 तिब्बत पर अपने नियंत्रण को मजबूत करने के लिए ड्रैगन अब नई चालें चल रहा है। प्रशासन में अहम पदों पर तिब्बतियों की भागीदारी को लगातार सीमित कर रहा है। वाशिंगटन स्थित अधिकार संगठन इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (ICT) की एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन तिब्बत पर अपना राजनीतिक नियंत्रण लगातार मजबूत कर रहा है और महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों पर तिब्बतियों की भागीदारी सीमित होती जा रही है। महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले पदों से तिब्बतियों को दूर रखा जा रहा है।

मानवीय सहायता और वित्त पोषण बहाल करने की मांग
ICT ने अमेरिकी संसद से भारत और नेपाल में रह रहे तिब्बती समुदायों के लिए मानवीय सहायता और अन्य सहयोग का पूरा वित्त पोषण बहाल करने की मांग की है। साथ ही संगठन ने CTA की क्षमता बढ़ाने के प्रयासों का समर्थन करने की अपील की है।  सीटीए तिब्बत की निर्वासित सरकार है और इसका मुख्यालय भारत के धर्मशाला में है। यह दुनिया भर में तिब्बती प्रवासियों का प्रतिनिधित्व करती है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और संस्कृति के संरक्षण जैसी सामुदायिक सेवाओं का संचालन करती है। तिब्बत के आध्यात्मिक नेता 14वें दलाई लामा हैं, जबकि सिक्योंग (राष्ट्रपति) सीटीए के राजनीतिक प्रमुख होते हैं।

 'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत' में अनुसंधान एवं निगरानी प्रमुख भुचुंग त्सेरिंग ने मंगलवार को कहा, ''भारत तिब्बतियों को वह आधार उपलब्ध कराता है, जिससे वे अपनी इच्छानुसार काम कर सकें। इसी वजह से हम वहां यह आधार तैयार कर पाए हैं और उसका यहां इस्तेमाल कर रहे हैं।'' त्सेरिंग ने कहा कि अमेरिका में तिब्बत के मुद्दे को दोनों प्रमुख दलों का समर्थन मिला है और अमेरिकी संसद में 'अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट' (तिब्बत के भविष्य को सुनिश्चित करने संबंधी अधिनियम) पेश किया गया है, जिसे अभी मंजूरी मिलनी बाकी है। उन्होंने कहा, ''अमेरिकी संसद को दोनों दलों द्वारा समर्थित 'अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट' (एएफटीए) को पारित करना चाहिए। यह सीटीए को तिब्बती लोगों के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देकर उसे अधिक वैधता प्रदान करता है।''

240 पदों में से तिब्बतियों के पास केवल 62 पद
रिपोर्ट के अनुसार, चीन नेतृत्व पदों पर नियुक्तियों, नए कानूनों और पार्टी निर्देशों के माध्यम से तिब्बत पर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहा है। संगठन का दावा है कि 2026 में प्रांतीय और काउंटी स्तर की पार्टी, सरकार, सुरक्षा और न्यायपालिका से जुड़ी 10 संस्थाओं में वरिष्ठ नेतृत्व के 240 पदों में से केवल 62 पदों पर तिब्बती थे। यानी इन पदों में तिब्बतियों की हिस्सेदारी 25.8 प्रतिशत रही, जबकि 178 पदों यानी 74.2 प्रतिशत पर गैर-तिब्बती नियुक्त थे।

ICT में अनुसंधान एवं निगरानी प्रमुख भुचुंग त्सेरिंग ने अमेरिकी संसद से दोनों दलों के समर्थन वाले ‘अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट’ को पारित करने की भी अपील की। उनका कहना है कि इससे केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को तिब्बती लोगों के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर अधिक वैधता मिल सकती है। बता दें कि हाल में चीन ने पूर्वी तिब्बत के एक वरिष्ठ तिब्बती अधिकारी को  सख्त सजा देते हुए उनके पद से हटा दिया। बताया जा रहा है कि द्रुक बुम ग्याल नाम के अफसर ने तिब्बती बौद्ध धार्मिक परंपराओं पर चीन की ओर से लगाए जा रहे नए प्रतिबंधों को तुरंत लागू करने से इनकार कर दिया था। 

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